Yogi Cabinet Expansion : बिहार बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश की बारी है. उत्तर प्रदेश में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की . खबर है कि यह मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार की औपचारिकताओं को अंतिम रूप देने के लिए हो रही है. माना जा रहा है कि अगर सब कुछ तय रणनीति के अनुसार रहा, तो अगले 24 से 48 घंटों के भीतर 6 नए मंत्री शपथ ले सकते हैं.
#WATCH | Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath meets UP Governor Anandiben Patel at the Lok Bhavan in Lucknow. pic.twitter.com/vJ51TD08md
— ANI (@ANI) May 9, 2026
Yogi Cabinet Expansion:भावी मंत्रियों को लखनऊ में रहने का निर्देश
सूत्रों के हवाले से खबर है कि जिन विधायकों को मंत्री बनाया जाना है,उन्हें आलाकमान की ओर से संदेश भेजना शुरू कर दिया गया है. संभावित मंत्रियों को हिदायत दी गई है कि वे रविवार को लखनऊ में ही मौजूद रहें. चर्चा है कि इस बार मंत्रिमंडल में लगभग छह नए चेहरों को जगह दी जा सकती है.
नो रिप्लेसमेंट पॉलिसी: न कोई हटेगा, न विभाग बदलेगा
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है. खबर है कि इस विस्तार में किसी भी मौजूदा मंत्री की छुट्टी नहीं की जाएगी और न ही किसी के विभाग में फेरबदल होगा. पार्टी का मानना है कि चुनाव के ऐन वक्त पर किसी भी वरिष्ठ नेता को नाराज करना जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए सिर्फ खाली पदों को भरने और समीकरण साधने पर जोर दिया जा रहा है.
इन नामों पर टिकी हैं सबकी नजरें
योगी मंत्रिमंडल के संभावित चेहरों में कई दिग्गज और चौंकाने वाले नाम रेस में हैं. चर्चाओं के अनुसार:
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पूजा पाल और मनोज पांडेय (सपा के खिलाफ मजबूत घेराबंदी के लिए)
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भूपेंद्र चौधरी और महेंद्र सिंह (अनुभवी चेहरे)
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सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान, संतोष सिंह, हंसराज विश्वकर्मा और आशा मौर्य. इसके अलावा ब्रज क्षेत्र के एक विधायक और संगठन से जुड़े एक ब्राह्मण चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल कर क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है.
पूजा पाल के जरिए सपा को घेरने का ‘मास्टरस्ट्रोक’
मंत्रिमंडल विस्तार में पूजा पाल का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है. भाजपा उन्हें शामिल कर एक साथ कई निशाने साधने की तैयारी में है. पूजा पाल के जरिए पार्टी महिला कार्ड और पिछड़ा वर्ग (OBC) वोट बैंक को मजबूती दे सकती है. साथ ही, उन्हें समाजवादी पार्टी के खिलाफ एक प्रखर सियासी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है.
दिल्ली दरबार की दौड़ और ‘राहत’ की खबर
पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री खुश नहीं हैं. इसे लेकर कई मंत्री दिल्ली में अपनी पैरवी भी कर आए थे. हालांकि, चुनाव नजदीक होने के कारण पार्टी के एक वर्ग ने नेतृत्व को समझाया है कि इस समय किसी को हटाने से जनता में गलत संदेश जाएगा. ऐसे में उम्रदराज मंत्रियों और विवादों में रहे चेहरों ने फिलहाल राहत की सांस ली है.

