India Secret Missile Test : बीती 8 मई की शाम, जब सूरज ढल चुका था, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित पड़ोसी देश बांग्लादेश के आसमान में एक अद्भुत और डरावना नजारा देखने को मिला. आसमान के सीने को चीरती हुई एक चमकदार संतरी-सफेद रोशनी वाली वस्तु तेजी से आगे बढ़ती दिखी. देखते ही देखते इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. लोगों ने इसे उल्कापिंड से लेकर यूएफओ (UFO) तक समझ लिया, लेकिन असल कहानी भारतीय रक्षा तैयारियों से जुड़ी थी.
Breaking: Unknown missile test activity spotted over the Bay of Bengal.#India had earlier issued a NOTAM restricting airspace from May 6–9 over a 3,560 km corridor linked to Abdul Kalam Island off the Odisha coast, a key site for strategic missile launches, fueling speculation… pic.twitter.com/jCv4GUYk8e
— Wolverine Update (@W0lverineupdate) May 8, 2026
India Secret Missile Test : ओडिशा से बांग्लादेश तक खलबली
यह नजारा शाम 6:30 से 7:30 बजे के बीच देखा गया. लॉन्च साइट से सैकड़ों किलोमीटर दूर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में भी लोग इस चमकदार पूंछ वाली वस्तु को देखकर हैरान रह गए. बताया जा रहा है कि भारत ने ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ITR) से एक लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया था. आसमान में दिखने वाली यह चमक मिसाइल के ‘एग्जॉस्ट प्लम’ (निकलने वाली गैसों) पर पड़ती सूरज की आखिरी किरणों का परिणाम थी, जिसे ‘ट्वाइलाइट इफेक्ट’ कहा जाता है.
3560 किमी का ‘नोटैम’ और गहराता सस्पेंस
इस लॉन्च की सबसे चौंकाने वाली बात इसका दायरा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस परीक्षण के लिए बंगाल की खाड़ी के ऊपर लगभग 3,560 किलोमीटर लंबा ‘नो फ्लाई जोन’ (NOTAM) घोषित किया गया था. तुलना के लिए बता दें कि 1 मई को हुए एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट के लिए सिर्फ 1,680 किमी का क्षेत्र आरक्षित था. इतना बड़ा कॉरिडोर आमतौर पर अग्नि-5 या उससे भी उन्नत लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
क्या यह अग्नि-6 या हाइपरसोनिक सिस्टम था?
सोशल मीडिया पर रक्षा प्रेमियों के बीच चर्चा है कि यह अग्नि-5 का एडवांस वर्जन या फिर भारत की गुप्त अग्नि-6 मिसाइल का प्रारंभिक परीक्षण हो सकता है. कुछ एक्सपर्ट्स इसे ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ (MIRV) तकनीक से भी जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि, भारतीय रक्षा मंत्रालय या डीआरडीओ (DRDO) ने इस परीक्षण को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
सरकार की चुप्पी के क्या हैं मायने?
भारत आमतौर पर अपने सफल रक्षा परीक्षणों की जानकारी साझा करता है, लेकिन रणनीतिक रूप से संवेदनशील और गुप्त मिशनों पर अक्सर चुप्पी साधे रखता है. 8 मई का यह टेस्ट भी इसी श्रेणी में आता दिख रहा है. 3,560 किमी की मारक क्षमता वाला यह परीक्षण चीन जैसे विरोधियों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है. भले ही आधिकारिक पुष्टि न हुई हो, लेकिन वायरल वीडियो और जारी किया गया नोटैम इस बात की गवाही दे रहे हैं कि चांदीपुर से भारत ने अपनी सामरिक शक्ति का बड़ा प्रदर्शन किया है.

