लीची संकट पर कृषि मंत्री शिवराज का बड़ा फैसला, बनी विशेषज्ञ कमेटी

नई दिल्ली/मुजफ्फरपुर: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के लीची किसानों की समस्याओं को लेकर एक बेहद संवेदनशील और त्वरित कदम उठाया है। लीची की फसल को 'स्टिंग बग' नामक कीट से हो रहे भारी नुकसान की खबर मिलते ही मंत्री ने बिना देरी किए एक विशेषज्ञ टास्क फोर्स (कार्यबल) बनाने का आदेश दिया। यह विशेष टीम प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी ताकि किसानों को इस संकट से उबारा जा सके।

किसानों की पुकार पर मंत्री का तत्काल एक्शन

हाल ही में लखनऊ के एक कार्यक्रम के दौरान लीची किसानों ने शिवराज सिंह चौहान को बताया था कि स्टिंग बग के कारण उनकी मेहनत की फसल बर्बाद हो रही है। किसानों की व्यथा सुनकर केंद्रीय मंत्री ने तत्काल इसका संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने तुरंत आदेश जारी कर एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन कर दिया है। यह टीम न केवल नुकसान का आकलन करेगी, बल्कि किसानों को इस कीट से बचने के वैज्ञानिक तरीके और समाधान भी बताएगी।

विशेषज्ञ टीम करेगी जमीनी स्तर पर जांच

इस टास्क फोर्स में कृषि जगत के कई बड़े विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है, जिसकी कमान मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक को सौंपी गई है। टीम में बिहार सरकार के बागवानी मिशन, कृषि विश्वविद्यालयों के कीट वैज्ञानिक और बेंगलुरु व रांची के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कार्यबल जल्द ही बिहार के उन प्रमुख जिलों और प्रखंडों का दौरा करेगा जहां लीची की पैदावार सबसे ज्यादा होती है और जहां कीट का हमला सबसे भीषण है।

एक सप्ताह में तैयार होगी राहत की रणनीति

प्रशासन ने इस मामले में समय की महत्ता को समझते हुए टीम को बेहद कम समय दिया है। टास्क फोर्स को अपनी पूरी जांच और सुझावों वाली रिपोर्ट मात्र एक सप्ताह के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री को पेश करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों के लिए राहत पैकेज, विस्तार गतिविधियों और तकनीकी परामर्श की घोषणा करेंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि लीची उत्पादकों को आर्थिक तबाही से बचाया जा सके।

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