Suvendu Adhikari PA : पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद शुरु हुई हिंसा के बाद मुख्यमंत्री पद के दावेदार शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या से पूरे बंगाल में बवाल मचा हुआ है. चुनाव खत्म होने और सरकार बनाने की गहमा गहमी के बीच बुधवार देर शाम उत्तर 24 परगना के मध्यग्राम इलाके में शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ (Chandranath Rath) की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हमले में उनके ड्राइवर भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
Suvendu Adhikari PA की कैसे हुई ह’त्या ?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने इस हत्याकांड को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया. चंद्रनाथ रथ की कार का पीछा एक अन्य कार और बाइक सवार कर रहे थे. मध्यग्राम के पास पीछा कर रही कार ने रथ की गाड़ी को ओवरटेक कर रुकवाया, जिसके बाद बाइक सवार हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो लगभग 10 राउंड फायरिंग हुई, जिसमें चंद्रनाथ को 5 गोलियां लगीं. अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होने दम तोड़ दिया.
कौन थे चंद्रनाथ रथ? (Chandranath Rath Profile)
42 वर्षीय चंद्रनाथ रथ केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि उनका प्रोफाइल काफी प्रभावशाली था.
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पूर्व वायुसेना अधिकारी: राजनीति में आने से पहले वह भारतीय वायुसेना (IAF) में देश की सेवा कर चुके थे.
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शुभेंदु के भरोसेमंद: वह पूर्वी मिदनापुर के चांदीपुर के रहने वाले थे। साल 2019 में जब शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार में मंत्री थे, तब से चंद्रनाथ उनके साथ जुड़े थे.
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संकट के साथी: जब शुभेंदु ने टीएमसी छोड़ी, तब भी चंद्रनाथ उनके साथ डटे रहे और भाजपा में उनके साथ सक्रिय भूमिका निभाई.
स्ट्रॉन्गरूम विवाद से आए थे चर्चा में
चंद्रनाथ रथ का नाम पहली बार 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था.भवानीपुर में स्ट्रॉन्गरूम विवाद के समय उन्होंने मोर्चा संभाला था. जब ममता बनर्जी स्ट्रॉन्गरूम के भीतर गई थीं, तब शुभेंदु की अनुपस्थिति में चंद्रनाथ ने ही भाजपा समर्थकों का नेतृत्व किया था और पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई थी.
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जांच और तनाव
घटना के बाद पुलिस ने एक संदिग्ध कार जब्त की है, जिस पर सिलीगुड़ी का नंबर है. हालांकि, पुलिस को शक है कि नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ की गई है. फॉरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए हैं. इस हत्या के विरोध में नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया है और बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
चुनाव के ठीक बाद हुई इस हाई-प्रोफाइल हत्या ने बंगाल की राजनीति में फिर से उबाल ला दिया है. एक पूर्व सैन्य अधिकारी और सक्रिय राजनीतिक सहयोगी की इस तरह हत्या होना पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. भाजपा के लोग इस हत्या के पीछे टीएमसी क ाहाथ मान रहे हैं, जिसके कारण प्रदेश में स्थिति और विस्फोटक हो गई है.

