Iran-Pakistan Relations : तेहरान/इस्लामाबाद – ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान को ईरान ने कड़ा संदेश दिया है. ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान की मध्यस्थता क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उसे ‘अविश्वसनीय (Incredible)’ करार दिया है.Iran-Pakistan Relations : तेहरान/इस्लामाबाद – ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान को ईरान ने कड़ा संदेश दिया है. ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान की मध्यस्थता क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उसे ‘अविश्वसनीय (Incredible)’ करार दिया है.
Iran-Pakistan Relations : पाकिस्तान में मध्यस्थता की साख नहीं: इब्राहिम रेजाई
ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पाकिस्तान को लेकर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “पाकिस्तान हमारा मित्र और अच्छा पड़ोसी है, लेकिन वह वार्ता के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है. उसमें मध्यस्थता के लिए आवश्यक विश्वसनीयता का अभाव है.” रेजाई ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान हमेशा डोनाल्ड ट्रंप के हितों को ध्यान में रखता है और अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं कहता.
پاکستان دوست و همسایه خوب ماست اما واسطه مناسبی جهت مذاکرات نیست و اعتبار لازم را برای واسطهگری ندارد. آنها همیشه مصلحت ترامپ را در نظر میگیرند و برخلاف میل آمریکاییها حرفی نمیزنند بطور مثال حاضر نیستند به دنیا بگویند که آمریکا ابتدا پیشنهاد پاکستان را پذیرفت اما بعد زیر حرفش…
— ابراهیم رضایی (@EbrahimRezaei14) April 26, 2026
“अमेरिका के आगे झुकता है पाकिस्तान”
रेजाई ने पाकिस्तान की तटस्थता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन पाकिस्तान लगातार एक पक्ष की ओर झुका रहता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान दुनिया को यह बताने की हिम्मत नहीं रखता कि अमेरिका पहले वादे करता है और फिर मुकर जाता है. चाहे वह जब्त संपत्तियों का मामला हो या लेबनान से जुड़ी प्रतिबद्धताएं, अमेरिका अपनी बात से पीछे हटा है और पाकिस्तान इस पर चुप्पी साधे रहा.
ईरानी विदेश मंत्री ने रखीं सख्त शर्तें
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अपनी क्षेत्रीय यात्रा के दौरान फिर से पाकिस्तान पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक, अराघची ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया है कि यदि वह मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है, तो उसे ईरान की इन शर्तों पर गौर करना होगा:
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर एक नई कानूनी व्यवस्था लागू करना.
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पिछले नुकसान का मुआवजा प्राप्त करना.
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भविष्य में किसी भी सैन्य आक्रामकता न होने का लिखित आश्वासन.
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देश के खिलाफ लगी नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह समाप्त करना.
यूरोप और रूस पर ईरान का ध्यान
पाकिस्तान की मध्यस्थता से असंतुष्ट दिख रहा ईरान अब यूरोप और रूस की ओर हाथ बढ़ा रहा है. अब्बास अराघची ने फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से फोन पर लंबी बातचीत की है और अब वे रूस के लिए रवाना हो चुके हैं. ईरान का मानना है कि इस संघर्ष को सुलझाने में यूरोपीय देश अधिक रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं.
ट्रंप की वापसी और बढ़ती धमकियां
जैसे ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से रवाना हुआ, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त तेवर अपनाए हैं. ट्रंप की नई धमकियों के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ईरान का पाकिस्तान पर भरोसा न करना इस बात का संकेत है कि वह आने वाले समय में सीधे अमेरिका या फिर किसी बड़ी वैश्विक शक्ति (जैसे रूस या फ्रांस) के जरिए ही बातचीत का रास्ता चुनना चाहता है.

