बिहार विधानसभा फ्लोर टेस्ट में पास हुए सम्राट चौधरी,ध्वनि मत से जीता विश्वास प्रस्ताव

Samrat Chaudhary’s Floor Test :पटना: बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम रहा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया है. सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पर हुई वोटिंग के दौरान सरकार के पक्ष में पर्याप्त समर्थन मिला, जिसके बाद ध्वनि मत से विश्वास प्रस्ताव को पारित कर दिया गया. बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार करने के साथ ही सम्राट सरकार ने अपनी मजबूती की पहली परीक्षा पास कर ली है.

Samrat Chaudhary’s Floor Test : विश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित

विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अनुमति से शुरू हुई. कार्यवाही के दौरान जैसे ही विश्वास प्रस्ताव पेश किया गया, सत्ता पक्ष पूरी तरह एकजुट नजर आया. विपक्ष ने संख्या बल के आधार पर चुनौती देने की कोशिश तो की, लेकिन अंततः बहुमत सम्राट चौधरी के पक्ष में रहा. विपक्ष के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने सरकार की राह और आसान कर दी, हालांकि इन विधायकों के गायब रहने पर अब सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

विधानसभा में सम्राट चौधरी का भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद सम्राट चौधरी पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. उनके सदन में प्रवेश करते ही एनडीए के विधायकों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। विधायकों ने उन्हें गुलदस्ते भेंट किए और उनके पक्ष में नारेबाजी की. इस दौरान सम्राट चौधरी काफी आत्मविश्वास में नजर आए. उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया और कहा कि उनकी सरकार बिहार के विकास और सुशासन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी रही चर्चा का विषय

इस बार विधानसभा की कार्यवाही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो अब राज्यसभा के सदस्य बन चुके हैं, सदन में मौजूद नहीं थे. बिहार की राजनीति में दशकों तक सक्रिय रहने के बाद उनकी अनुपस्थिति पर सदन के भीतर और बाहर काफी चर्चा होती रही. राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं, जहां अब कमान सम्राट चौधरी के हाथों में है.

अनुपस्थित विधायकों पर टिकी सबकी नजरें

फ्लोर टेस्ट के दौरान कुछ विधायकों की गैरमौजूदगी ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. हालांकि, इन विधायकों के न आने से सरकार की स्थिरता पर कोई खतरा नहीं पड़ा, लेकिन सियासी पंडित इसे भविष्य के किसी बड़े उलटफेर या असंतोष के संकेत के रूप में देख रहे हैं. अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में एनडीए और विपक्षी गठबंधन इन अनुपस्थित विधायकों को लेकर क्या रुख अपनाते हैं.

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