कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक की. राज्यसभा LoP मल्लिकार्जुन खरगे के घर हुई इस बैठक में इंडिया गठबंधन के सभी साथियों के अलावा लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए.
बैठक के बाद कहा गया कि, मोदी सरकार एक बहुत ही गलत, गैर-संवैधानिक और फ़ेडरल-विरोधी डिलिमिटेशन प्रोसेस Delimitation Bill को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है. जिसका सामना विपक्ष एकजुट होकर करेगा.
The Modi government is attempting to push a deeply flawed, unconstitutional and anti-federal delimitation exercise.
In this context, a meeting was held at the residence of Congress President & Rajya Sabha LoP Shri @kharge to discuss the issue.
LoP Shri @RahulGandhi and other… pic.twitter.com/XomvlZ2ojq
— Congress (@INCIndia) April 15, 2026
हम विमेंस रिज़र्वेशन बिल के खिलाफ़ नहीं हैं-खरगे
वहीं बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़न ने साफ किया कि इंडिया गठबंधन महिला आरक्षण बिल के खिलाफ़ नहीं हैं. उन्होंने कहा, “ हम सब विमेंस रिज़र्वेशन बिल के पक्ष में हैं. लेकिन, जिस तरह से इसे लाया गया है, वह शक के दायरे में आता है, और हमें इस पर बहुत शक है. यह पॉलिटिक्स से जुड़ा है. मोदी सरकार विपक्षी पार्टियों को टारगेट करने और दबाने के लिए इस तरह से काम कर रही है.
हमने लगातार विमेंस रिज़र्वेशन बिल का सपोर्ट किया है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि इसे पहले पास हुए अमेंडमेंट के हिसाब से लागू किया जाना चाहिए.
डीलिमिटेशन पर, सरकार कुछ चालें चलती दिख रही है. इसलिए, सभी विपक्षी पार्टियां एक साथ खड़ी होंगी और पार्लियामेंट में लड़ेंगी.
मैं साफ़-साफ़ कहना चाहता हूं कि हम विमेंस रिज़र्वेशन बिल के खिलाफ़ नहीं हैं.”
We are all in favour of the Women’s Reservation Bill. However, the way in which it has been brought is questionable, and we have serious reservations about it. It is politically motivated. The Modi government is acting in this manner to target and suppress opposition parties.
We… pic.twitter.com/mxiVxxWmvr
— Congress (@INCIndia) April 15, 2026
केंद्र का आबादी के आधार पर लोकसभा सीटों का सीमांकन पंजाब के साथ भेदभाव: बादल
इससे पहले एनडीए के सहियोगी रहे शिरोमणि अकाली दल के चीफ सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को दावा किया कि महिला रिजर्वेशन की आड़ में, पार्लियामेंट्री सीटों की आबादी के आधार पर डिलिमिटेशन का केंद्र का प्रपोज़्ड कदम, पंजाब के खिलाफ “बहुत ज़्यादा भेदभाव वाला” है.
बादल ने कहा कि उनकी पार्टी महिला रिज़र्वेशन के पूरी तरह पक्ष में है, लेकिन इसे “डीलिमिटेशन के लिए एक बहाना” के तौर पर इस्तेमाल करने का कड़ा विरोध करती है.
पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर ने X पर एक पोस्ट में कहा, “पंजाब, जो ज़्यादातर माइनॉरिटी वाला राज्य है, इस डीलिमिटेशन की सबसे बड़ी शिकार होगा.”
उन्होंने कहा कि पंजाब में लोकसभा सीटों की संख्या में सिर्फ़ मामूली बढ़ोतरी होगी, जबकि हरियाणा में लगभग 100 परसेंट की बढ़ोतरी होगी, जिससे संसद के निचले सदन में उसका रिप्रेजेंटेशन लगभग दोगुना हो जाएगा.
बादल ने कहा, “जनसंख्या को डीलिमिटेशन का एकमात्र आधार बनाकर, यह कदम पंजाब को जनसंख्या कंट्रोल पर नेशनल एजेंडा को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए सज़ा देता है और उन राज्यों को इनाम देता है जिन्होंने उन लक्ष्यों को नहीं माना है.”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित डीलिमिटेशन की कवायद भारत का ज़्यादा कंट्रोल सिर्फ़ चार हिंदी-भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान को सौंपने की एक साज़िश लगती है, जिसमें लोकसभा में उनकी कुल संख्या को लगभग दोगुना करके और कुल सीटों के 40 परसेंट से ज़्यादा कर दिया जाएगा.
Delimitation Bill को लेकर सरकार का क्या कहना है
सरकार ने संसद का बजट सेशन बढ़ा 16 से 18 अप्रैल तक सदन की तीन दिन की स्पेशल बैठक बुलाई गई है, जिसमें 2029 में इसे लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में बदलाव लाए जाएंगे.
पिछली पब्लिश हुई जनगणना के आधार पर डिलिमिटेशन के बाद, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला रिज़र्वेशन कानून को “ऑपरेशनलाइज़” करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 कर दी जाएगी.
संविधान संशोधन बिल के ड्राफ़्ट के अनुसार, जिसे संसद की आने वाली स्पेशल बैठक में पेश किया जाएगा, महिलाओं के लिए 33 परसेंट रिज़र्वेशन को शामिल करने के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी.

