Robert Vadra summoned : नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस शिकायत पर आधिकारिक संज्ञान लिया है, जिसमें वाड्रा पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. यह पूरा मामला हरियाणा के शिकोहपुर गांव में साल 2008 में हुए एक विवादित जमीन सौदे से संबंधित है. कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा सहित मामले के सभी आरोपियों को 16 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कड़ा निर्देश दिया है.
Delhi court takes cognisance of ED chargesheet against Robert Vadra in case linked to land deal in Haryana’s Shikohpur
Delhi court directs Robert Vadra, other accused in Haryana land deal case to appear before it on May 16. pic.twitter.com/Dbtgpkzkzc
— Press Trust of India (@PTI_News) April 15, 2026
Robert Vadra summoned:करोड़ों के ‘अपराध से अर्जित धन’ का है मामला
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में रॉबर्ट वाड्रा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. ईडी का दावा है कि हरियाणा में किए गए जमीन के इस कथित फर्जी सौदे के जरिए ‘अपराध से अर्जित धन’ (Proceeds of Crime) पैदा किया गया था. जांच एजेंसी के मुताबिक, शिकोहपुर मामले में वाड्रा को लगभग 58 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे,जो मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आते हैं. इसी आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की विभिन्न धाराओं के तहत वाड्रा समेत 11 व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ अपनी शिकायत यानी चार्जशीट दाखिल की थी.
साल 2018 से जारी है कानूनी घेराबंदी
इस विवाद की जड़ें साल 2018 में दर्ज हुई एक एफआईआर से जुड़ी हैं. उस समय हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा, रॉबर्ट वाड्रा और रियल एस्टेट सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे डीएलएफ (DLF) और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने और दस्तावेजों की जालसाजी करने के आरोप लगाए गए थे. जांच के दौरान यह पाया गया कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर निजी लाभ कमाया गया.
क्या है शिकोहपुर जमीन सौदे का विवाद
यह मामला साल 2005 से 2014 के बीच हरियाणा में कांग्रेस सरकार के दौरान हुए भू-खंडों के आवंटन से जुड़ा है. आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने शिकोहपुर में बेहद कम दाम पर जमीन खरीदी और बाद में लैंड लाइसेंस मिलने के तुरंत बाद उसे भारी मुनाफे के साथ रियल एस्टेट कंपनियों को बेच दिया. ईडी का तर्क है कि इस सौदे में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया और फर्जी कागजात तैयार किए गए ताकि वित्तीय लाभ लिया जा सके. एजेंसी ने इस पूरे लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा माना है.
राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल
अदालत द्वारा समन जारी किए जाने के बाद अब इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की उम्मीद है. चूंकि रॉबर्ट वाड्रा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति हैं, इसलिए बीजेपी और अन्य विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने का मौका मान रहे हैं. वहीं, वाड्रा पहले भी इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं. अब 16 मई को होने वाली कोर्ट की पेशी के बाद इस मामले में जांच की दिशा तय होगी.

