पंचतत्व में विलीन हुईं आशा भोसले, शिवाजी पार्क में हुआ अंतिम संस्कार, बेटे ने दी मुखाग्नि

Asha Bhosle funeral :  भारतीय सिनेमा के संगीत जगत का एक चमकता सितारा आज पंचतत्व में विलीन हो गया.  अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले का आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.

Asha Bhosle funeral : बेटे आनंद ने दी मुखाग्नि 

आज  मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया. उनके बेटे आनंद भोसले ने उन्हें मुखाग्नि दी, जिसके साथ ही ‘सुरों की रानी’ पंचतत्व में विलीन हो गईं. इस भावुक पल के दौरान वहां मौजूद परिवार, बॉलीवुड हस्तियों और प्रशंसकों की आंखें नम थीं. प्रकृति के पांच तत्वों—मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश में भले ही उनकी देह समा गई हो, लेकिन उनकी खनकती आवाज युगों-युगों तक इस दुनिया में गूंजती रहेगी.

महज 10 साल की उम्र से शुरु कर दिया था काम 

आशा भोसले का निधन 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ।. उन्हें बीते शनिवार को छाती में संक्रमण और अत्यधिक थकान की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद, रविवार को मल्टी-ऑर्गन फेलियर के चलते उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके बेटे आनंद भोसले ने इस अपूरणीय क्षति की पुष्टि की, जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई. सोमवार सुबह उनके लोअर परेल स्थित आवास ‘कासा ग्रांडे’ पर अंतिम दर्शनों के लिए तांता लगा रहा, जहां राजनेताओं से लेकर सिनेमा जगत के दिग्गजों ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

बहन लता मंगेशकर के साथ शुरु किया संगीत का सफर 

8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मी आशा भोसले संगीत के दिग्गज दीनानाथ मंगेशकर की सुपुत्री और स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं. छोटी उम्र में ही पिता के साये से महरूम होने के बाद उन्होंने और लता जी ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी. आशा ताई ने अपने करियर की शुरुआत 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ से की थी, जबकि बॉलीवुड में उनकी एंट्री 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गीत ‘सावन आया’ से हुई. उन्होंने अपने अद्भुत करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी.

 हरफनमौला अंदाज और चुलबुलापन,यही थी आशा ताई की पहचान  

‘दम मारो दम’, ‘ये मेरा दिल’, और ‘रमैया वस्तावैया’ जैसे सदाबहार गीतों के जरिए उन्होंने भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दी. उनकी वर्सटिलिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप और कैबरे तक हर शैली में महारत हासिल की. कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म विभूषण’ जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा. आज भले ही आशा ताई हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत और उनके गाए गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा पुंज बनकर हमेशा जीवित रहेंगे.

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