ट्रंप की नाकाबंदी से भड़का ड्रैगन,अमेरिका को दी सीधी चेतावनी-‘हमारे मामले में दखल दिया तो…

China Warns America :अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव अब एक बड़े वैश्विक टकराव की ओर बढ़ गया है. पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता की विफलता के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर जिस नाकाबंदी का ऐलान किया है, उसने चीन की नींद उड़ा दी है. ईरान के प्रति ट्रंप के कड़े रुख के खिलाफ अब चीन खुलकर मैदान में आ गया है. ड्रैगन ने अमेरिका को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वह उनके द्विपक्षीय व्यापारिक और ऊर्जा हितों के बीच में न आए.

China Warns America : ट्रंप की धमकी के बाद गर्माया माहौल 

तनाव की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप प्रशासन ने इंटेल रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए चीन पर ईरान को सैन्य हथियार सप्लाई करने का संदेह जताया. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर सख्त लहजे में कहा कि यदि चीन ईरान की सैन्य मदद करते हुए पकड़ा गया, तो उस पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाएगा. ट्रंप की इस धमकी और होर्मुज की नाकाबंदी ने चीन को सीधा निशाना बनाया है, क्योंकि बीजिंग अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सबसे ज्यादा ईरानी तेल पर निर्भर है.

‘कोई भी बाहरी शक्ति हमारे मामलों में हस्तक्षेप ना करें वर्ना’- चीन 

चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून ने ट्रंप के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजिंग मध्य पूर्व की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट(Hormuz Strait)में चीन के जहाजों की आवाजाही जारी है और ईरान के साथ उनके ऊर्जा समझौते अटूट हैं. चीन ने अमेरिका को आगाह करते हुए कहा कि होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण है और यह मार्ग चीन के लिए खुला है, लिहाजा कोई भी बाहरी शक्ति उनके व्यापारिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश न करे.

अपनी उर्जा जरुरतों के लिए ईरान पर निर्भर है चीन  

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के निर्देशानुसार, सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले सभी जहाजों की नाकाबंदी शुरू हो जाएगी. यह कदम सीधे तौर पर चीन की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर चोट करने जैसा है. चूंकि चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, इसलिए होर्मुज में किसी भी तरह की रुकावट से चीन की एनर्जी सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है.

गौरतलब है कि ट्रंप ने पहले वेनेजुएला के तेल व्यापार पर शिकंजा कसकर चीन को आर्थिक चोट पहुंचाई थी और अब वह ईरान के जरिए ड्रैगन को घेरने की तैयारी में हैं. ईरान के साथ खड़े होकर चीन न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बचाने की कोशिश कर रहा है, बल्कि अमेरिका को यह संदेश भी दे रहा है कि वह अब वाशिंगटन के एकतरफा दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है. फिलहाल, होर्मुज के मुहाने पर तैनात अमेरिकी युद्धपोत और चीन के कड़े तेवर दुनिया को एक नए बड़े संकट की ओर ले जा रहे हैं.

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