INS Taragiri : समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और नौसैनिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में आज भारत के लिए ऐतिहासिक दिन हैं. भारत ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट ‘INS तारागिरी (F41)’ को औपचारिक रूप से समंदर की लहरों पर राज करने के लिए उतर दिया है. भारतीय नौसेना के इस गौरवशाली का गवाह बनने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम में पहुंचे, जिन्होने भारत की बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता का सीधा संदेश दुनिया को दिया.
Defence Minister Rajnath Singh has commissioned INS Taragiri (F41), the fourth stealth frigate under the Project 17A program, into the Indian Navy at Visakhapatnam on 3 April 2026. Taragiri belongs to the Nilgiri‑class, replacing older frigates and representing a major step in… pic.twitter.com/nZGNAtdFG1
— RB. (@rahul4bisht) April 3, 2026
INS Taragiri की क्या है खासियत
INS Taragiri युद्धपोत प्रोजेक्ट 17A के तहत विकसित किया गया चौथा फ्रिगेट है, जिसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड के द्वारा किया गया है. INS तारागिरी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 75% से अधिक स्वदेशी निर्माण सामग्री है, जो भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारती है. अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस होने की वजह से ये युद्धपोत दुश्मन के रडार को चकमा देने में माहिर है, जिससे इसकी मारक क्षमता और अधिक घातक हो जाती है.
INS Taragiri की ताकत
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो INS तारागिरी हथियारों के एक चलते-फिरते किले की तरह है. इसमें दुनिया की सबसे तेज मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, अत्याधुनिक MF-STAR रडार और MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम लगाया गया है. पनडुब्बियों का काल बनने के लिए इसमें विशेष रॉकेट और टॉरपीडो सिस्टम शामिल हैं, जबकि नजदीकी हमलों से निपटने के लिए 30mm और 12.7mm के क्लोज-इन वेपन सिस्टम मुस्तैद हैं.
इस खास युद्धपोत के कमिशन के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत के पूर्वी समुद्री तट के रणनीतिक महत्व से जोड़ा और कहा कि तारागिरी की कमीशनिंग भारतीय नौसेना की लड़ाकू तैयारी और ऑपरेशनल क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी. यह युद्धपोत न केवल भारत की रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाएगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के दबदबे को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा.

