अमेरिका का सीजफायर प्लान ईरान ने ठुकराया, बढ़ाए हमले, मिडिल ईस्ट में तबाही का खतरा गहराया

Pakistan Proposal Rejected : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच हालात और गंभीर होते जा रहे हैं. अमेरिका द्वारा भेजे गए 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है. इसके साथ ही तेहरान ने सैन्य कार्रवाई और तेज कर दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा गहरा गया है.

Pakistan Proposal Rejected:पाकिस्तान की मध्यस्थता बेअसर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए यह प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाया था. इस प्रस्ताव में प्रतिबंधों में राहत, नागरिक परमाणु सहयोग, मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जैसे अहम मुद्दे शामिल थे. लेकिन ईरान ने इस पहल को गंभीरता से लेने के बजाय पूरी तरह खारिज कर दिया है.

ईऱान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़गारी ने सोशल मीडिया में जारी एक संदेश में कहा कि ” ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव के 14 बिंदुओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़गारी ने कहा कि तेहरान का रुख “कभी नहीं बदलेगा,” और यह भी जोड़ा कि वह वाशिंगटन के साथ “कभी किसी समझौते पर नहीं पहुंचेगा.” उन्होंने अमेरिका की “रणनीतिक शक्ति” को “रणनीतिक विफलता” करार दिया. 

सैन्य मोर्चे पर बढ़ती गतिविधि

एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. मरीन सैनिकों की मदद के लिए पैराट्रूपर्स की तैनाती शुरू कर दी गई है. इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं. हाल ही में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को निशाना बनाया गया, जहां हमले के बाद भीषण आग लग गई और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया.

तेल संकट की बढ़ती आशंका

ईरान की रणनीति का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते नियंत्रण और ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने वैश्विक बाजार को हिला दिया है.यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20% तेल परिवहन का मुख्य रास्ता है, ऐसे में यहां तनाव बढ़ने से दुनिया भर के देशों में तेल की कीमतों में उछाल आ गया है.

खाड़ी देशों में भी हमले

ईरान ने सिर्फ इजरायल ही नहीं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में भी हमले तेज कर दिए हैं. कतर और बहरीन जैसे देशों में भी बमबारी की खबरें सामने आई हैं. कतर के अल उदैद एयरबेस और अन्य अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ गई है.

मौजूदा हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर होती जा रही है. जहां एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई लगातार तेज हो रही है.  हैरानी की बात ये है कि एक तरफ अमेरिका ईरान के सामने सीजफायर का प्रस्ताव दूसरे देशों के जरिये तेहरान भेज रहा है, वही दूसरी तरफ ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर लगातार हमले करके ईरान को बर्बाद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है. ऐसे में इस युद्ध को रोकने के लिए किये जा रहे प्रयासों  का  जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर बड़ा आर्थिक और सुरक्षा संकट पैदा कर सकता है.

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