‘उसे ऐसा न करने के लिए कहा था’, ईरानी गैस फील्ड हमले को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू क दोस्ती में पड़ी दरार

एक अहम ईरानी गैस फील्ड पर हमला करने के इज़राइल के फैसले को लेकर US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्राइम मिनिस्टर बेंजामिन नेतन्याहू Trump, Netanyahu के बीच साफ़ मतभेद सामने आए हैं. ये घटना ईरान के खिलाफ US-इज़राइल के जॉइंट हमले से खाड़ी में तनाव बढ़ने के कुछ हफ़्ते बाद सामने आई है.
साउथ पारस गैस फील्ड पर इज़राइल के हमले से मिडिल ईस्ट में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरान के जवाबी हमले शुरू हो गए, जिससे पहले से ही ऊंची ग्लोबल एनर्जी की कीमतें और बढ़ गईं और खाड़ी के सहयोगी देशों ने ट्रंप से नेतन्याहू पर लगाम लगाने की अपील की.

US-ईरान युद्ध में Trump, Netanyahu के अलग-अलग लक्ष्यों के क्या संकेत हैं?

ट्रंप और नेतन्याहू के मतभेदों ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि दोनों नेता एक ऐसे युद्ध को चलाने में कितने एकमत हैं जो शुरू में मिलकर किया गया था. उनके बीच कोई भी अंतर लड़ाई की दिशा और उसके आखिरी नतीजे, दोनों पर असर डाल सकता है.
जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ ओवल ऑफिस में मीटिंग के दौरान बोलते हुए, ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के सबसे ज़रूरी एनर्जी एसेट माने जाने वाले हिस्से पर इज़राइल के हमले का समर्थन नहीं करते हैं.
ट्रंप ने नेतन्याहू के फैसले के बारे में कहा, “मैंने उनसे कहा, ‘ऐसा मत करो.'” “हमारी आपस में अच्छी बनती है. यह तालमेल से होता है, लेकिन कभी-कभी वह कुछ कर देते हैं. और अगर मुझे यह पसंद नहीं आता — और इसलिए हम अब ऐसा नहीं कर रहे हैं.”

US के साथ साझा मकसद पर नेतन्याहू ने क्या कहा

हालांकि, नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल ने हमला करने में “अकेले काम किया” और कन्फर्म किया कि वह गैस फील्ड पर आगे और हमले न करने के ट्रंप के अनुरोध पर सहमत हो गए हैं. उन्होंने दोनों के बीच मतभेद की बात को भी मामूली बताया.
नेतन्याहू ने येरुशलम में कहा, “यह कहा जा रहा है कि मैं 40 साल से कह रहा हूं कि ईरान इज़राइल और दुनिया के लिए खतरा है. यह सच है.” उन्होंन कहा, “आप जानते हैं कि यह और किसने कहा? प्रेसिडेंट ट्रंप ने.”
उन्होंने आगे कहा, “देखिए, मुझे नहीं लगता कि कोई भी दो लीडर प्रेसिडेंट ट्रंप और मेरे जितना कोऑर्डिनेटेड रहे हैं. वह लीडर हैं. मैं उनका साथी हूँ. अमेरिका लीडर है.”
ट्रंप का स्ट्राइक पर पहला पब्लिक रिएक्शन कुछ घंटों बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में आया, जिसमें उन्होंने कहा कि US को हमले के बारे में पहले से “कुछ नहीं पता था”.
हालांकि, इस मामले से जुड़े दो सोर्स ने कहा कि वॉशिंगटन को इज़राइल के प्लान के बारे में पहले से पता था, और द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, एक ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच टारगेट को कोऑर्डिनेट किया जा रहा है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ट्रंप ने इज़राइल से ऐसे और हमले रोकने को कहा था.

ईरान के साथ युद्ध पर US-इज़राइल का तालमेल

सीनियर US अधिकारियों ने तब से ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तालमेल पर ज़ोर देने की कोशिश की है, जबकि यह भी कहा है कि वॉशिंगटन की स्ट्रैटेजी आखिरकार US के नेशनल सिक्योरिटी हितों से चलती है.
US कैंपेन का फोकस ईरान की मिसाइल क्षमताओं को कमज़ोर करना, उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को टारगेट करना और नेवल एसेट्स पर हमला करना रहा है. इसके उलट, इज़राइल ने ईरान के लीडरशिप को अस्थिर करने की बड़ी कोशिश के तहत, हाई-प्रोफाइल हत्याओं सहित ज़्यादा आक्रामक स्ट्रैटेजी अपनाई है.

न्यूक्लियर हथियार बनाम मिडिल ईस्ट में दबदबा क्या है असल मकसद

नेतन्याहू ने इस लड़ाई को मिडिल ईस्ट को नया आकार देने के मौके के तौर पर देखा है, और एक ऐसे भविष्य की कल्पना की है जहाँ ईरान पर ज़्यादा नरम लीडरशिप का राज हो. इज़राइल में मज़बूत घरेलू सपोर्ट ने उन्हें एक लंबा कैंपेन चलाने के लिए पॉलिटिकल स्पेस दिया है.
इस बीच, ट्रंप ने लगातार कहा है कि उनका मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि ईरान के पास “कभी भी न्यूक्लियर हथियार न हो,” भले ही लड़ाई को लेकर उनकी बड़ी बयानबाजी बदल गई हो.
नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने हाउस इंटेलिजेंस हियरिंग के दौरान सांसदों से कहा, “प्रेसिडेंट ने जो मकसद तय किए हैं, वे इज़राइली सरकार के तय किए गए मकसदों से अलग हैं.”
हाल के दिनों में, ट्रंप ने ईरान में सरकार बदलने के पहले के सुझावों को भी नरम किया है. हालांकि उन्होंने पहले इशारा किया था कि ईरानियों को जल्द ही अपनी लीडरशिप को हटाने का मौका मिल सकता है, लेकिन तब से उन्होंने ऐसे नतीजे की संभावना पर शक जताया है.
हाल ही में फॉक्स न्यूज़ रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “तो, मुझे सच में लगता है कि जिन लोगों के पास हथियार नहीं हैं, उनके लिए यह एक बड़ी रुकावट है. मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी रुकावट है.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह नेतन्याहू की ईरानियों से उठ खड़े होने की अपील का सपोर्ट करते हैं, तो ट्रंप ने कहा कि ऐसी उम्मीदें सच नहीं हो सकतीं. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बीबी भी यह समझ जाएंगा”

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