तबाही: सुलेमानी की मौत के बाद भड़का ईरान, इजरायल पर बरसा दिए क्लस्टर बम

तेहरान। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब अपने 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और स्थिति पहले से कहीं अधिक विस्फोटक हो गई है। युद्ध के 18वें दिन इजरायल द्वारा तेहरान में की गई एक बड़ी सैन्य कार्रवाई ने इस आग में घी डालने का काम किया है। इस हमले में ईरान के दो बेहद प्रभावशाली नेता सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी मारे गए हैं। इन मौतों की पुष्टि के बाद पूरे तेहरान में शोक की लहर है और ईरान ने इसका भीषण बदला लेने का संकल्प लिया है। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने इजरायल पर क्लस्टर बमों और मल्टी-वॉरहेड मिसाइलों से हमला किया है।
ईरान का दावा है कि ये हमले सीधे तौर पर तेहरान में हुई हत्याओं का प्रतिशोध हैं। इस बीच, युद्ध की लपटें अन्य खाड़ी देशों तक भी पहुंचती दिख रही हैं। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस के पास एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया है, जबकि दुबई और दोहा से भी धमाकों की खबरें मिली हैं। बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास को भी ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। मानवीय क्षति के आंकड़े भी डराने वाले हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरवानी के अनुसार, अब तक अमेरिका-इजरायल हमलों में 1,300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का अनुमान है कि यह संख्या 1,858 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष में अब तक 773 लोगों की जान जा चुकी है। राजनयिक स्तर पर भी तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ किसी भी समझौते या मध्यस्थता के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में 1% की मामूली गिरावट देखी गई है। जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खींच रहा है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका से सहमा हुआ है।

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