जेफरी एपस्टीन से रिश्तों को लेकर हरदीप पुरी की बेटी को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली राहत, इस संबंध में भारत से अपलोड कंटेंट हटाने का हुआ आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी Hardeep Puri की बेटी हिमायती पुरी का संबंध दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से होने से जुड़ी सभी सामग्री को हटा दिया जाए. कोर्ट ने भारत में IP एड्रेस से अपलोड की गई सभी कथित रूप से बदनाम करने वाली सामग्री को 24 घंटे के अंदर हटा दिया जाए. इसमें रिपोर्ट, सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और दूसरी सामग्री शामिल हैं.

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा

जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने कंटेंट को तुरंत ग्लोबल टेकडाउन करने का ऑर्डर देने से मना कर दिया, लेकिन यह निर्देश दिया कि भारत के बाहर अपलोड किए गए मटीरियल को देश के अंदर एक्सेस करने से ब्लॉक किया जाए.
कोर्ट ने हिमायनी के मानहानि केस में समन भी जारी किया और सुनवाई की अगली तारीख 7 अगस्त तय की.
कोर्ट ने आदेश में कहा, “समन जारी करें. डिफेंडेंट नंबर 1 से 14 और डिफेंडेंट नंबर 21 (जॉन डो— अनजान पार्टी) को निर्देश दिया जाता है कि वे 24 घंटे के अंदर बताए गए कंटेंट के URL, लिंक तुरंत हटा दें. अगर 24 घंटे में कंटेंट नहीं हटाया जाता है, तो डिफेंडेंट नंबर 15 से 18 (सोशल मीडिया इंटरमीडियरी) एनेक्सर A में दिए गए डिटेल के अनुसार पोस्ट, आर्टिकल और लिंक हटा देंगे, और उन तक पहुंच ब्लॉक कर देंगे.”

कोर्ट ने कंटेंट को ग्लोबल टेकडाउन करने का आदेश देने से किया इनकार

इसमें आगे कहा गया कि, “यह निर्देश दिया जाता है कि आज दिए गए निर्देश भारत और भारतीय डोमेन के अधिकार क्षेत्र में पालन किए जाने वाले निर्देश हैं. मौजूदा रोक का आदेश भारत के अंदर IP एड्रेस से अपलोड किए गए कंटेंट के संबंध में भारतीय डोमेन में लागू होता है. जहां तक इस आदेश के साथ अटैच किए गए URLs की बात है, जो भारत के बाहर से अपलोड किए गए हैं, डिफेंडेंट्स को निर्देश दिया जाता है कि वे उन्हें भारतीय डोमेन में देखने से डिसेबल कर दें”.
यह तब हुआ जब हिमायनी पुरी के वकील, महेश जेठमलानी, प्रमोद कुमार दुबे और शांतनु अग्रवाल ने कोर्ट से ग्लोबल टेकडाउन का ऑर्डर देने की रिक्वेस्ट की. उनका कहना था कि उनकी क्लाइंट, जो न्यूयॉर्क की रहने वाली हैं, पर कुछ सोर्स ने “बदतमीज़ी भरा हमला” किया है, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि वह एक कैबिनेट मिनिस्टर की बेटी हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने उठाया कोर्ट के अधिकार पर सवाल

लेकिन, गूगल और मेटा समेत सोशल मीडिया इंटरमीडियरी के वकील ने ग्लोबल टेकडाउन की रिक्वेस्ट का विरोध किया और कहा कि क्या भारतीय कोर्ट के पास सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को दुनिया भर से कंटेंट हटाने का निर्देश देने का अधिकार है, यह सवाल अभी हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने पेंडिंग है.
हालांकि, मेटा के वकील अरविंद दातार ने कहा कि कोर्ट अभी भी भारत में अपलोड किए गए कंटेंट के बारे में निर्देश दे सकता है.
जन गण मन 24×7 ने कंटेंट हटाने के फैसले का विरोध किया
यूट्यूब चैनल जन गण मन 24×7 के वकील ने मुकदमे का विरोध किया और कहा कि जिन वीडियो पर सवाल है, वे पत्रकारिता की आज़ादी का इस्तेमाल थे, बस दूसरे डिफेंडेंट के ट्वीट के आधार पर सवाल उठा रहे थे, और ऐसी फेयर पत्रकारिता की इजाज़त होनी चाहिए.

Hardeep Puri की बेटे हिमायनी ने अपनी याचिका में क्या कहा

अपने मुकदमे में, हिमायनी ने कहा कि 22 फरवरी, 2026 से, X, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन, डिजिटल न्यूज़ पोर्टल, ब्लॉग और दूसरे वेब-बेस्ड पब्लिकेशन समेत सोशल मीडिया और इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म पर झूठे, गुमराह करने वाले और बदनाम करने वाले पोस्ट और आर्टिकल पब्लिश और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए.
आरोपों को झूठा बताते हुए, उन्होंने अपने केस में कहा था कि बेबुनियाद दावों को सोच-समझकर सनसनीखेज और जोड़-तोड़ वाले फॉर्मेट के ज़रिए फैलाया गया, जिसमें एडिट किए गए वीडियो, गुमराह करने वाले कैप्शन और डॉक्टर्ड थंबनेल शामिल हैं, ताकि लोगों का गुस्सा ज़्यादा से ज़्यादा हो सके.

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