Tuesday, March 3, 2026

भारत के पास 25 दिनों का कच्चा तेल और रिफाइंड तेल का स्टॉक है: सूत्र

India Crudeoil Status : ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत सरकार के विश्वस्त सूत्रों के हवाले से ये खबर आ रही है कि भारत में फिलहाल अगले 25 दिनों के लिए क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल और रिफाइंड आयल का स्टॉक उपलब्ध है और अगर मिडिल ईस्ट में लड़ाई से स्थिति और खराब होती है तो भारत अपनी जरुरत के लिए कच्चा तेल, LPG और LNG इंपोर्ट करने के लिए दूसरे रास्तों की तलाश कर रहा है.

India Crudeoil Status:फिलहाल भारत में नहीं बढ़ेंगे तेल के दाम 

समाचार एजेंसी ANI के सूत्रों के मुताबिक वेस्ट एशिया में तनाव के बीच देश में फिलहाल पेट्रोल – डीज़ल की कीमतों को अभी बढ़ाने का सरकार का कोई प्लान नहीं है. मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे हमले और युद्ध की स्थिति में सोमवार को भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने PSUs के सीनियर अधिकारियों के साथ क्रूड ऑयल, LPG और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई की स्थिति का रिव्यू किया.

 पेट्रोलियम मंत्री ने किया रिव्यू मीटिंग

रिव्यू मीटिंग के बाद पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने कहा है कि वह लगातार बदलते हालात  और बड़े पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता नज़र रख रही है. आपको बता दें कि वर्तमान समय में भारत में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम और नेचुरल गैस का सबसे बड़ा हिस्सा मिडिल इस्ट से आता है. ऐसे में सरकारी सूत्रों के हवाले से ये जानकारी आ रही है कि सरकार तेल की कीमतों को स्थिर बनाये रखने के लिए जरुरी कदम उठा रही है.

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा है – “हम लगातार बदलते हालात पर नज़र रख रहे हैं . देश में बड़े पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता और किफ़ायती दाम पक्का करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएँगे.”

इसके अलावा, कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के कॉमर्स डिपार्टमेंट ने सभी स्टेकहोल्डर मंत्रालयों, खास लॉजिस्टिक्स और ट्रेड फैसिलिटेशन पार्टनर्स के साथ एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन किया. इसमें वेस्ट एशिया में उभरती जियो-पॉलिटिकल स्थिति और भारत के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कार्गो फ्लो, पर इसके संभावित असर का रिव्यू किया गया.

कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के मुताबिक, मीटिंग की अध्यक्षता कॉमर्स विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी सुचिंद्र मिश्रा और फॉरेन ट्रेड के डायरेक्टर जनरल (DGFT) लव अग्रवाल ने की.

मीटिंग में लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर्स और शिपिंग लाइन्स/फॉरवर्डर्स, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स, डिपार्टमेंट ऑफ़ फाइनेंशियल सर्विसेज़, मिनिस्ट्री ऑफ़ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस, मिनिस्ट्री ऑफ़ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वॉटरवेज़, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया, एक्सपोर्ट प्रमोशन इकोसिस्टम और दूसरी संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए. स्टेकहोल्डर्स ने बदलते ऑपरेशनल माहौल का असेसमेंट दिया. इस एसेसमेंट में रूटिंग और ट्रांज़िट-टाइम में बदलाव, वेसल शेड्यूलिंग एडजस्टमेंट, कंटेनर/इक्विपमेंट की उपलब्धता, फ्रेट और इंश्योरेंस कॉस्ट ट्रेंड्स, और टाइम-सेंसिटिव एक्सपोर्ट्स पर पड़ने वाले असर भी   शामिल थे.

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा, “चर्चा में कार्गो मूवमेंट में प्रेडिक्टेबिलिटी बनाए रखने, टाली जा सकने वाली देरी को कम करने और एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स के लिए आसान डॉक्यूमेंटेशन और पेमेंट प्रोसेस पक्का करने की ज़रूरत पर बात हुई.”

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