Tuesday, March 3, 2026

पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारत पर: खाद्य तेल-उर्वरक आयात होंगे महंगे, शिपिंग कंपनियां लगा रहीं युद्ध अधिभार

उद्योग संगठनों ने सोमवार को कहा कि अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष के बढ़ने से भारत के खाद्य योग्य सूरजमुखी तेल और जरूरी उर्वरकों के आयात में रुकावट आ सकती है, जबकि पश्चिम एशिया और यूरोप को कृषि जिंसों का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। पोत परिवहन कंपनियों ने पश्चिम एशिया से गुजरने वाले मालवाहक पोतों (कार्गो) पर आपात संघर्ष अधिभार लगाना शुरू कर दिया है। इसमें फ्रांस की कंटेनर क्षेत्र की बड़ी कंपनी सीएमए सीजीएम प्रति कंटेनर 2,000 डॉलर से 4,000 डॉलर के बीच अधिभार लगा रही है, जिससे आयात की लागत बढ़ रही है।घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ (एसएफआईए) के अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती ने कहा, पश्चिम एशिया को निर्यात अभी ठप पड़ा हुआ है। युद्ध जारी रहने के साथ जोखिम भी बढ़ेगा और शिपिंग कंपनियां बीमा अधिभार लगा सकती हैं, जिससे आयात महंगा हो जाएगा।

राजीब चक्रवर्ती ने जताई चिंता 

चक्रवर्ती ने जून में शुरू होने वाले घरेलू खरीफ बुवाई सत्र से पहले डीएपी और एसएसपी उर्वरक बनाने के लिए जरूरी माल की आपूर्ति पर चिंता जताई। साथ ही कहा, इतने सारे बंदरगाह बंद होने से जाम लगेगा और कंटेनर की कमी हो जाएगी। कतर, सयुक्त अरब अमीरात और ओमान मिलकर भारत के गंधक (सल्फर) आयात का 76 फीसदी हिस्सा बनाते हैं। भारत हर साल 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है, जिसमें सूरजमुखी तेल का हिस्सा करीब 20 फीसदी है, जो मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से आता है।

आपूर्ति में रुकावट आई तो निर्यात के लिए अपनाना होगा दूसरा रास्ता

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक, बीवी मेहता ने कहा, अभी तक कोई असर नहीं पड़ा है। लेकिन, युद्ध जारी रहा, तो तो सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में रुकावट आ सकती है, क्योंकि निर्यात खेप को दूसरा रास्ता अपनाना होगा। ऊर्जा की लागत, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक जैव ईंधन बाजार के बीच संबंध को देखते हुए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बढ़ा सकती हैं। भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी तरह की तनातनी का सीधा असर भारत के कच्चे तेल और खाद्य तेल के बाजारों पर पड़ेगा।
 

Latest news

Related news