मंगलवार को कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल को सौंप दिया है. PTI की खबर के मुताबिक, विपक्ष ने ओम बिरला के खिलाफ नोटिस में कहा है कि सदन में विपक्षी सदस्यों के खिलाफ स्पीकर की टिप्पणी ‘इस संवैधानिक पद के दुरुपयोग’ का संकेत है.
वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सेक्रेटरी जनरल को उन्हें पद से हटाने के लिए कांग्रेस के प्रस्ताव की जांच करने का निर्देश दिया.
अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने नहीं किए साइन
कांग्रेस पार्टी की ओर से लोकसभा महासचिव को सौंपे नोटिस पर 118 सांसदों का साइन है. हलांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किया है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि संसदीय लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष के स्पीकर को हटाने के नोटिस पर साइन करना सही नहीं माना जाता है.
Om Birla ने दिए नोटिस के जांच के आदेश
लोकसभा सचिवालय ने भी कांग्रेस के नोटिस मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि नियमों के अनुसार इसका आकलन करके आगे के कदम उठाए जाएंगे.
वहीं, स्पीकर ओम बिरला ने भी नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर जवाब दिया है. उन्होंने लोकसभा सेक्रेटेरिएट से “नो-कॉन्फिडेंस नोटिस की जांच करने और प्रोसेस में तेज़ी लाने” को कहा है.
नोटिस में क्या कहा गया है
कांग्रेस ने ये नोटिस नियम 94सी के तहत दिया है. इसमें लोकसभा की कार्यवाही में “साफ़ तौर पर पक्षपातपूर्ण तरीके” का आरोप लगाया गया है. साथ ही नोटिस में यह भी कहा गया है कि विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बार-बार सदन में बोलने का मौका नहीं दिया गया है, उन्होंने कहा कि यह उनके बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार का हनन है.
इसके साथ ही कांग्रेस के 8 सांसदों के निलंबन और कांग्रेस की महिला सांसदों पर प्रधानमंत्री पर हमला करने की कोशिश करने का आरोप लगाना वाले बयान का भी जिक्र है.
चल रहे बजट सेशन के बीच लोकसभा में लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है.
इस गतिरोध को तोड़ने की पिछली कोशिशों में, बिरला ने केंद्र और विपक्षी नेताओं के बड़े नेताओं से मुलाकात की, जिसमें LoP राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव शामिल थे.
इंडिया गठबंधन के फ्लोर लीडर की बैठक में लिया गया फैसला
आज सुबह संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार किया गया था. बैठक में तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी(शरद पवार गुट) सहित कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया.
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