Wednesday, January 21, 2026

राज्यसभा में खाली होने वाली है 5 सीटें, क्या बिहार छोड़कर राज्यसभा जायेंगे नीतीन नबीन ?

Nitin Nabin : बिहार के बांकीपुर विधानसभा से लगातार 5 बार के विधायक रहे नीतीन नबीन मंगलवार को बतौर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना कार्यभार संभाला. प्रधानमंत्री मोदी और तन पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह और अमित शाह की मौजूदगी में अपना कार्यभार संभाला.

Nitin Nabin ने शुरु किया अपना काम 

राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभालते ही उन्होने पहला काम केरल विधानसभा और कुछ निगम चुनावों के चुनाव के लिए प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्ति का किया. बुधवार को वो कई प्रदेशों के बीजेपी पार्टी अध्यक्षों , राज्य प्रभारियों और संगठन महासचिवों से मुलाकात करते रहे. बतौर पार्टी अध्यक्ष अब नीतीन नबीन का अगला टास्क पश्चिम बंगाल चुनाव है , और इसके लिए वो जल्द ही राज्य का दौरा भी करने वाले हैं .  अब सवाल  उठ रहा है कि क्या नीतीन नबीन बतौर विधायक बिहार विधानसभा के  बजट सेशन  मे हिस्सा लैंगे ? बिहार में विधान सभा का बजट सेशन 2 फरवरी से शुरू हो रहा है.

 नीतीन नबीन विधायक ही रहैंगे ये जायेंगे राज्यसभा ?

यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि इन्होने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले भले ही बिहार सरकार में मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन अपने विधानसबा क्षेत्र बांकीपुर से वो अभी भी विधायक बने हुए हैं. ऐसे में अगर वो एक विधायक के तौर पर बने रहते है तो उन्हें विधानसभा के सत्र के दौरान कार्यवाही में शामिल होने के लिए पटना आना पड़ेगा.

ऐसे में चर्चा चल रही है कि अगर नीतीन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर दिल्ली मे ही रहें तो उन्हें अपना समय और उर्जा पार्टी और संगठन के काम में लगाने में मदद मिलेगी.

राज्यसभा में लाये जा सकते हैं नीतीन नबीन ?

2026 में बिहार कोटे से राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं और इनमें से 4 सीट पर एनडीए के उम्मीदवार की जीत लगभग पक्की है.4 में दो सीट जेडीयू और दो सीट बीजेपी के पास है. ऐसे में अगर नीतीन नबीन चाहे तो उनके लिए राज्यसभा में आना कोई मुश्किल बात नहीं होगी. राज्यसभा के सांसद होने के बाद वो दिल्ली में अपने सरकारी घर में रहते हुए काम कर सकते हैं. राज्यसभा से इस बार बीजेपी के 30 सांसद रिटायर हो रहे हैं. संख्या बल के हिसाब से देखा जाये तो बीजेपी आने वाले समय में राज्यसभा में कम से कम 33 सीटें वह जीत सकती है. ऐसे में नीतीन नबीन को किसी भी राज्य से उम्मीदवार बनाकर राज्यसभा भेजा सकता है.

फिलहाल नीतीन नबीन के दिल्ली आने के संकेत नहीं

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीन नबीन बिहार से दिल्ली लाये जा सकते हैं लेकिन जानकारों के माने तो नीतीन नबीन अभी बिहार छोड़कर दिल्ली आने के मूड में नहीं हैं, ना ही बीजेपी चाहती है कि वो दिल्ली आयें. पार्टी चाहती है कि नबीन फिलहाल बिहार से विधायक बने रहें, ताकि बिहार से उनका कनेक्शन बना रहे, जैसे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया था.

राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के बाद भी अमित शाह बने रहे विधायक 

अमित शाह की बात करे तो  1997 से लगातार विधायक रहे. 2013 में राजनाथ सिंह की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए फिर 2014 में देश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पार्टी ने उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया. अमित शाह जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तब भी वो विधायक ही थे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने साथ ही विधायक रहते हुए  वो गुजरात विधानसभा की कार्रवाइयों में शामिल होते रहे . 2017 में उन्हें गुजरात से राज्यसभा में लाया गया फिर 2019 में उन्होंने गांधीनगर से लोकसभा का चुनाव जीता और लोकसभा के सदस्य बन गये.

अमित शाह के बारे में जानकारों का मानना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बाद भी उन्हें गुजरात से विधायक बनाये रखा ताकि प्रदेश में पार्टी संगठन और सरकार पर नजदीक से नजर रखा जा सकें.

हलांकि नीतिन नबीन को लेकर बीजेपी के सामने ऐसी कोई चुनौती नहीं है. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्र रहते किसी फेर बदल की आशंका कम है,इसके बावजूद जिस तरह से बीजेपी और जेडीयू के बीच आंख-मिचौली का खेल चलता रहता है, तो ऐसे में बिहार पर अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए जरुरी है कि भाजपा के बड़े नेता की पकड़ प्रदेश पर बनी रहे.

राज्यसभा के 71 सीटों पर होने हैं चुनाव

साल 2026 में राज्यसभा के 71 सीटो पर चुनाव होने वाले हैं और इसमें सबसे अधिक सीटें बीजेपी की हैं. बीजेपी की 30 सीटें खाली होने वाली हैंछह केंद्रीय मंत्रियों का कार्यकाल भी इस साल पूरा हो रहा है. राज्यसभा में इस समय सबसे अधिक 103 सदस्य बीजेपी से हैं. माना जा रहा है कि 71 सीटों पर होने वाले चुनाव के बाद इस संख्या में और बढोतरी हो सकती है. इस बीच कांग्रेस के 8 सांसद भी रिटायर हो रहे हैं, इनमें कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल हैं.

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