दिल्ली – दिल्ली के रामलीला मैदान में बीते 3 दिन से चल रहा जमीयत उलेमा ए हिंद का 34वां राष्ट्रीय अधिवेशन लगातार सुर्खियां बटोर रहा है.पहले जहां मौलाना महमूद मदनी द्वारा दिए गए बयान ने सुर्खिया बटोरी,वहीं आज 34 वें अधिवेशन के तीसरे दिन जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी द्वारा दिए गए भाषण के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है.जिसे जैन मुनि लोकेश द्वारा माहौल बिगाड़ने वाला बताया गया.दरअसल मौलाना अरशद मदनी ने अपने भाषण में मनु और आदम को एक बताने के साथ उन्हें सभी का पूर्वज बताया और कहा था कि मैंने धर्म गुरु से पूछा जब कोई नहीं था,न श्री राम,न ब्रह्म,तब मनु किसे पूजते थे? कुछ लोग बताते हैं कि वे ओम को पूजते थे तब मैंने कहा कि इन्हें ही तो हम अल्लाह,आप ईश्वर,फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं.
जैन मुनि लोकेश ने मौलाना मदनी को दी चुनौती
रामलीला मैदान में हो रहे जमीयत उलेमा ए हिंद के 34वें अधिवेशन में आज विभिन्न धर्म के लोगों को बकायदा निमंत्रण देकर अतिथि के तौर पर बुलाया गया था.जहां आज सर्व धर्म संसद से जुड़े विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु 34 वें अधिवेशन में ना सिर्फ पहुंचे बल्कि उन्होंने अपनी अपनी बात भी रखी.परमजीत सिंह चंडोक,स्वामी चिदानंद महाराज,जैन धर्म गुरु लोकेश मुनि के साथ कई धर्म गुरु कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे.वही इस सब के बीच मौलाना अरशद मदनी द्वारा अपने भाषण में दिए गए विवादित बयान के बाद जैन धर्म गुरु लोकेश मुनि द्वारा खुले तौर पर मंच से मौलाना अरशद मदनी का विरोध करने के साथ नाराजगी जताते हुए कहा कि मैं मौलाना मदनी के व्यक्तव्य से सहमत नही हूं.जैन मुनि ने मौलाना अरशद मदनी को दिल्ली या सहारनपुर दोनो में से कही शास्त्रार्थ करने की चुनौती भी दी.जैन मुनि ने कहा कि मौलाना मदनी के व्यक्तित्व से ना मैं सहमत हूं और ना ही सर्व धर्म संसद से जुड़ा कोई भी व्यक्ति सहमत है. हम यहां एकता और भाईचारे का संदेश देने आए है.जिसके बाद अपनी बात रखने के साथ जैन मुनि अपने सहयोगी और स्वामी चिदानंद महाराज के साथ मंच से चले गए.
मौलाना मदनी ने माहौल खराब किया – जैन मुनि लोकेश
जैन धर्म गुरु लोकेश मुनि ने बताया कि आज मैं और अन्य धर्मों से जुड़े लोग यहां छोटे मौलाना मदनी के कहने पर कार्यक्रम में सम्मिलित होने आए थे. मुझे इस बात की जानकारी भी दी गई थी कि यह एक सद्भावना सम्मेलन है.परमजीत सिंह चंडोक, स्वामी चिदानंद महाराज और मैंने अपने अपने संबोधन में प्यार मोहब्बत की बात करने के साथ देश को एकजुट रखने का संदेश दिया.कार्यक्रम में अच्छा माहौल चल रहा था लेकिन उसके बाद जो सहारनपुर से आए हुए मौलाना अरशद मदनी के द्वारा व्यक्तव्य आया उसने ना सिर्फ माहौल खराब किया बल्कि उसको लेकर हमारी कोई सहमति नहीं है.वह बिल्कुल ही अलग है. उसका सद्भावना से कोई संबंध नहीं है.हमको हमारे माता-पिता के द्वारा पैदा किया गया है भगवान महावीर का स्थान हमारे लिए हमारे माता-पिता से भी ऊपर है. जिस तरह से मौलाना अरशद मदनी के द्वारा अपने व्यक्त्व में कहा गया वह माहौल बिगड़ने वाला है.उसे इस सद्भावना सभा का माहौल बिगड़ने का काम किया गया है.सर्व धर्म संसद के सभी लोगों के द्वारा सहमति के साथ मौलाना अरशद मदनी के बयान का विरोध किया गया है।
जमीयत उलेमा ए हिंद का 34 वां अधिवेशन सद्भाव की भावना से आयोजित किया गया है.उसका हम लोग स्वागत करते हैं.लेकिन अरशद मदनी के द्वारा दिए गए बयान को लेकर किसी भी तरह की कोई सहमति नहीं है. योग भूषण जैन मुनि ने भी अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि आज की सद्भावना सभा में जिस तरह से एक धर्म को तरजीह दी गई वह सही नहीं है. जिसको लेकर सर्व धर्म संसद से जुड़े सभी लोग लोगों के द्वारा अपना विरोध जताया गया है.आज सभी धर्म गुरुओं को यहां इसलिए बुलाया गया था.ताकि भारत को आर्थिक रोजगार और अन्य दृष्टिकोण से कैसे मजबूत बनाया जाए.जिसपर बात होनी चाहिए थी लेकिन उसके ऊपर बात नहीं हुई.
हर विवाद का हल बातचीत से निकल सकता है- गुरु स्वामी चिदानंद
मौलाना अरशद मदनी के विवादित बयान पर खड़े हुए विवाद पर धर्म गुरु स्वामी चिदानंद ने कहा यहां बात आज सहमति और असहमति की नहीं है. किसी भी चीज का बायकॉट करना कभी भी कोई रास्ता नहीं है,रास्ता सिर्फ बातचीत और संवाद से निकल सकता है.आज पांच बातें निकल कर आई है.देश को आगे बड़ाने के लिए हमें सबको इसके लिए मिलकर काम करना है. जब मंच पर सब लोग होते हैं तो सभी को अपने-अपने ढंग से तरीके से बोलने का अधिकार होता है.क्योंकि सबकी अपनी मनोदशा होती है.हम सबको अपने देश के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है.पर्यावरण, पानी के लिए काम करने की आवश्यकता है. अधिक से अधिक पेड़ों को लगाएं ग्लोबल वार्मिंग एक चिंता का विषय है. मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पिछले 1400 सालों से हम लोग एक साथ हैं.यानी कि दुनिया उससे पहले भी थी और आगे आने वाले समय में भी रहेगी.लेकिन अब कुछ ऐसा माहौल बने जिससे हम आगे भी एक साथ ऐसे ही एकजुट होकर रहें.
स्वामी चिन्मयानंद ने अपनी बात आगे रखते हुए कहा कि मौलाना अरशद मदनी जो है इस्लाम को मानने वाले हैं और इस्लाम को पढ़ाते हैं .ऐसे में वह इस्लाम की बात सबसे ऊपर रखेंगे. मुझे नहीं लगता कि उनके दिल में होगा कि इस्लाम बड़े या उसे बढ़ाया जाए.हिंदू भी रहे, मुसलमान भी रहे, सिख भी रहे, ईसाई भी रहे . उसके साथ इंसानियत भी रहे यह सबसे अधिक जरूरी है.लोकेश मुनि क्यों नाराज हुए इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं मैं उनके साथ बात करूंगा.पहले केवल अल्लाह की बात होती थी.लेकिन आज ॐ की भी बात हुई. ओम पहला शब्द था . ओम का वजूद पहले भी था.जिसको आज नकारा नहीं गया है.आज कहा गया ओम ही अल्लाह है और अल्लाह को ओम में देखा जाए तो इससे बड़ा स्टेटमेंट कोई नहीं हो सकता है.

