Friday, January 16, 2026

विधवा बहू को है अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का हक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए विधवा बहू को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि मनुस्मृति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि माता, पिता, पत्नी और पुत्र को कभी नहीं छोड़ना चाहिए और ऐसा करने वाले व्यक्ति को दंडित किया जाना चाहिए। इसी सिद्धांत के आधार पर कोर्ट ने माना कि विधवा बहू को अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का हक है। मामला यह था कि यदि बहू ससुर के जीवनकाल में ही विधवा हो जाती है तो उसे भरण-पोषण मिल सकता है, लेकिन यदि ससुर की मृत्यु के बाद वह विधवा होती है तो क्या उसे यह अधिकार मिलेगा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि ससुर की मृत्यु के बाद विधवा बहू को भरण-पोषण का कोई हक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पति की मृत्यु के समय के आधार पर विधवा बहुओं के बीच भेदभाव करना पूरी तरह से तर्कहीन और असंवैधानिक है। दोनों ही परिस्थितियों में चाहे बहू ससुर के जीवन में विधवा हुई हो या उनकी मृत्यु के बाद उसे भरण-पोषण का पूरा अधिकार है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान मृतक हिंदू के निर्भर व्यक्तियों के भरण-पोषण की व्यवस्था करता है। मृतक की संपत्ति से उसके सभी वारिसों पर यह दायित्व बनता है कि वे निर्भर व्यक्तियों, जिनमें विधवा बहू भी शामिल है उसका भरण-पोषण करें। पीठ ने कहा कि पुत्र या कानूनी वारिस मृतक द्वारा कानूनी एवं नैतिक रूप से भरण-पोषण की जिम्मेदारी वाले सभी निर्भर व्यक्तियों को संपत्ति से सहायता देने के लिए बाध्य हैं इसलिए पुत्र की मृत्यु पर ससुर की धार्मिक एवं नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी विधवा बहू का भरण-पोषण करे। बशर्ते विधवा बहू स्वयं या मृत पुत्र द्वारा छोड़ी गई संपत्ति से अपना गुजारा नहीं कर सकती।
कोर्ट ने कहा कि अधिनियम इस जिम्मेदारी को किसी भी तरह से सीमित या समाप्त नहीं करता, चाहे बहू ससुर के जीवनकाल में विधवा हुई हो या उनकी मृत्यु के बाद। विधवा बहू को भरण-पोषण से वंचित करना, कानून की संकीर्ण या तकनीकी व्याख्या के आधार पर उसे गरीबी, असहायता और सामाजिक हाशिए पर धकेल देगा। इससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को गंभीर खतरा होगा। यह फैसला हिंदू परिवारों में विधवा महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। इससे अब विधवा बहुओं को ससुर की विरासत वाली संपत्ति से भरण-पोषण का स्पष्ट कानूनी संरक्षण मिल गया है।

Latest news

Related news