Supreme Court on stray dogs: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह हर कुत्ते के काटने और उससे होने वाली हर मौत के लिए राज्यों पर “भारी मुआवज़ा” लगाएगा और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को भी ऐसे हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराएगा जिनका “पूरी ज़िंदगी” असर रहता है.
किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए?-सुप्रीम कोर्ट
कानूनी पोर्टल बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “हर कुत्ते के काटने पर, हर मौत पर, हम राज्यों पर ज़रूरी इंतज़ाम न करने के लिए भारी मुआवज़ा तय करेंगे. और कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी ज़िम्मेदारी तय करेंगे. आप उन्हें अपने घर ले जाते हैं, उन्हें रखते हैं, तो उन्हें बाहर घूमने, काटने, पीछा करने की इजाज़त क्यों दी जानी चाहिए? कुत्ते के काटने का असर ज़िंदगी भर रहता है.”
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा, “जब नौ साल के बच्चे को कुत्तों ने मार डाला, जिन्हें एक खास संगठन खाना खिलाता था, तो किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? क्या उस संगठन को नुकसान के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए?”
Supreme Court on stray dogs: ‘कुत्ते का मूड नहीं पढ़ सकते’
पिछली सुनवाई में 7 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह जानना मुमकिन नहीं है कि कोई कुत्ता किस मूड में है, क्योंकि उसके आदेश का विरोध करने वालों ने तर्क दिया था कि जानवरों के साथ सहानुभूति से पेश आने पर हमले नहीं होते.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर जानवरों के साथ सहानुभूति से पेश आया जाए, तो वे हमला नहीं करेंगे.
लाइवलॉ के मुताबिक, सिब्बल ने कहा, “अगर आप उनकी जगह में घुसेंगे, तो वे हमला करेंगे.”
इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने जवाब देते हुए कहा कि यह सिर्फ काटने की बात नहीं है, बल्कि कुत्तों से होने वाले खतरे की भी बात है. जस्टिस नाथ ने पूछा, “आप कैसे पहचानेंगे? सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, आपको नहीं पता.”
एक समाधान सुझाते हुए सिब्बल ने कहा, “अगर कोई आवारा कुत्ता है, तो आप एक सेंटर को फोन करें. उसे स्टेरलाइज़ करके वापस छोड़ दिया जाएगा.”
सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों और मवेशियों के मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजानिया की तीन जजों की बेंच ने सड़कों और हाईवे पर जानवरों को लेकर सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं जताई हैं.
पिछले साथ कोर्ट ने कुत्तों को सड़कों से हटाने का आदेश दिया था
पिछले साल 7 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने और नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद उन्हें तय शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया था.
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