बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और सबसे प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों में से एक, खालिदा जिया Khaleda Zia का मंगलवार, 30 दिसंबर, 2025 को बीमारी से जूझने के बाद निधन हो गया. वह 80 साल की थीं. उनकी पार्टी ने अपने सोशल मीडिया पेज पर उनके निधन की दुखद खबर की घोषणा करते हुए कहा कि उनका निधन आज सुबह करीब 6 बजे फज्र की नमाज़ के ठीक बाद हुआ.
बीएनपी ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में कहा, “हम उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और सभी से उनकी दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करने का अनुरोध करते हैं.”
शेख हसीना ने जताया ‘गहरा दुख’
निर्वासित पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की मौत पर शोक व्यक्त किया और उनके निधन को देश की राजनीतिक जीवन के लिए एक बड़ा नुकसान बताया.
हसीना का शोक संदेश अवामी लीग ने अपने X अकाउंट पर शेयर किया. बयान में कहा गया, “मैं BNP चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा ज़िया के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं.”
Sheikh Hasina expresses condolences on the passing of Begum Khaleda Zia
–I extend my deepest condolences on the passing of BNP Chairperson and former Prime Minister Begum Khaleda Zia.
As the first woman Prime Minister of Bangladesh, and for her role in the struggle to… pic.twitter.com/gqvSEzzVlS
— Bangladesh Awami League (@albd1971) December 30, 2025
इसमें आगे कहा गया, “बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर, और लोकतंत्र की स्थापना के संघर्ष में उनकी भूमिका के लिए, राष्ट्र के लिए उनका योगदान महत्वपूर्ण था और उन्हें याद किया जाएगा. उनका निधन बांग्लादेश के राजनीतिक जीवन और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व के लिए एक गहरा नुकसान है.”
शेख हसीना ने यह संदेश भारत से भेजे है, जहां वह पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर अशांति के बीच सत्ता से हटाए जाने के बाद शरण लिए हुए हैं.
Khaleda Zia कौन थीं?
खालिदा ज़िया, जिनका जन्म जलपाईगुड़ी में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश भारत के अविभाजित दिनाजपुर जिले का हिस्सा था, ने 1991 में इतिहास रचा जब वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. इस्कंदर और तैयबा मजूमदार की बेटी, उन्होंने संसदीय लोकतंत्र की बहाली के बाद देश का नेतृत्व किया और 2001 से 2006 तक दूसरा कार्यकाल संभाला.
उनके परिवार में उनके बड़े बेटे तारिक रहमान, उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और उनकी बेटी ज़ाइमा रहमान हैं. तारिक 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे और फिलहाल BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष थी. वह आने वाले बांग्लादेश चुनावों में भी एक प्रमुख उम्मीदवार हैं. उनके छोटे बेटे अराफ़ात रहमान कोको का कई साल पहले मलेशिया में निधन हो गया था.
पति की हत्या के बाद रखा राजनीति में कदम
हालांकि, उनकी राजनीतिक यात्रा अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि एक दुखद घटना से शुरू हुई. वह अपने पति जियाउर रहमान की हत्या के बाद सार्वजनिक जीवन में आईं, जो 1977 से 1981 तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे और उन्होंने 1978 में BNP की स्थापना की थी. रहमान की 1981 में एक मिलिट्री तख्तापलट में हत्या कर दी गई थी.
इसके बाद के सालों में, ज़िया मिलिट्री शासन के खिलाफ आंदोलन में एक अहम चेहरा बनकर उभरीं. उन्होंने मिलिट्री तानाशाह हुसैन मुहम्मद इरशाद के शासन के खिलाफ विरोध को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई, जिन्हें आखिरकार 1990 में सत्ता से हटा दिया गया.
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