Thursday, February 12, 2026

17 साल बाद खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान लौटे अपने देश,भारत के लिए कितना अहम है रहमान की वापसी ?

Bangladesh Tarique Rahman : बंग्लादेश लगातार हिंसा की आग में जल रहा है. लोगों में मौजूदा यूनूस सरकार के खिलाफ गुस्सा है. ऐसे में बंग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे का 17 साल बाद अपने देश लौटना अपने आप में बेहद अहम संदेश लेकर आया है. तारिक उर रहमान के स्वागत में लाखों लोगों की भीड़ सड़कों पर जमा हो गई और उनका जमकर स्वागत किया गया.

सुबह 11.41 पर तारिक को लेकर ढाका पहुंचा विमान 

17 साल पहले बांग्लादेश छोड़कर विदेश भागने के लिए मजबूर किये गये तारिक़ रहमान गुरुवार को सुबह 11 बजकर 41 बजे ढाका के हज़रत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुँचे.

अपने नेता के स्वागत के लिए बंग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के हज़ारों कार्यकर्ता और समर्थक सड़कों निकल आये.एयरपोर्ट से बाहर निकल कर  रहमान ने भी हाथ हिलाकर अपने समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया.

बंग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले हैं आम चुनाव

लगतार हिंसा और तनाव से गुजर रहे बंग्लादेश में अगले साल फरवरी (12 फरवरी) में आम चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में राजनीति के लिहाज से ये समय काफी महत्वपूर्ण है. बंग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की राजनीतिक पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग को इस बार चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. ऐसे में कयास लगाये जा रहे हैं कि जिस तरह का समर्थन तारिक रहमान को मिल रहा है, ऐसे में अगर वो चुनाव लड़ जाते हैं,तो बंग्लादेश के नये प्रधानमंत्री बन सकते हैं. इस समय पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की सेहत खराब है और वो फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं. ऐसे में पार्टी की पूरी कमान तारिक़ रहमान के हाथों में ही है.

4 दशक से बंग्लादेश की राजनीति में खालिदा जिया का प्रभाव

बेगम ख़ालिदा ज़िया बीते चार दशक से भी ज़्यादा समय से बांग्लादेश की राजनीति में हैं. 1981 में राष्ट्रपति जिया उर्र रहमान की हत्या के बाद से पार्टी की कमान ख़ालिदा ज़िया के ही हाथों में हैं.खालिदा जिया हमेशा से अपने देश में बहुदलीय लोकतंत्र की समर्थक रही हैं.

पति की मौत के बाद 1991 में खालिदा जिया बंग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्रा बनी. दूसरी बार 2001 में चुनाव जीता और फिर प्रधानमंत्री बनी. 2006 तक वो बंग्लादेश की प्रधानमंत्री रही. फिर उनपर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगा और आखिरकार  उनकी हार हुई. लाखों की हेराफेरी के मामले में बेटे तारीक रहमान को भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए  बंग्लादेश छोड़कर लंदन जाना पड़ा.

पिछले तीन चुनावों में बीएनपी ने आम चुनावों का बहिष्कार किया, वहीं पिछले साल बंग्लादेश में शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ शुरू हुए आंदोलन का ख़ालिदा ज़िया ने खुलकर समर्थन किया था. इस समय बंग्लादेश में शेख हसीना और उनकी पार्टी के खिलाफ गुस्सा चरम पर है. वर्तमान यूनुस सरकार से भी लोग बेहद नाखुश हैं. ऐसे में  माना जा रहा है कि इस समय देश की सबसे बड़ी पार्टी बीएनपी अगले साल फऱवरी में होने वाले चुनाव में सत्ता में आ सकती है और ऐसा हुआ तो तारिक रहमान देश के नये प्रधानमंत्री बन सकते हैं.

पीएम मोदी ने खालिदा जिया की सेहत लेकर जताई चिंता 

प्रधानमंत्री मोदी ने 1 दिसंबर को ही  बेगम खालिदा जिया की सेहत के बारे में एक ट्वीट किया था, जिसमें लिखा कि उन्हें  “ये जानकर बहुत चिंता हुई है कि उनकी सेहत बेहद खराब है. हम उनके जल्द ठीक होने के लिए दिल से प्रार्थना करते हैं और शुभकामनाएं देते हैं. भारत हर संभव तरीके से मदद करने के लिए तैयार है.”

80 वर्षीय बेगम खालिदा जिया 23 नवंबर 2025 से ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में भर्ती हैं. उन्हें सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल लाया गया था लेकिन  बाद में उनकी पुरानी बीमारियां (लिवर, किडनी, हृदय संबंधी जटिलताएं, डायबिटीज, आर्थराइटिस आदि) बढ़ गईं. उन्हें कोरोनरी केयर यूनिट (CCU) में शिफ्ट किया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है. उनकी हालत बहुत नाजुक बनी हुई है.

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