Thursday, January 22, 2026

राहुल गांधी ने प्रदूषण के मुद्दे को संसद में उठाया,सरकार से की चर्चा की मांग..कहा कम से कम इस मुद्दे पर तो हम आ सकते हैं साथ

Rahul Gandhi : संसद के शीतकालीन सत्र में आज लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राजधानी दिल्ली और देश के अलग-अलग शहरों में बढ़ रहे जहरीले प्रदूषण के मुद्दे को उठाया.राहुल गांधी ने कहा कि प्रदूषण की समस्या लगातार विकराल होती जा रही है.पूरी आबादी एक जहरीले चादर के भीतर जीने के लिए मजबूर हैं.लाखों बच्चों और बुजुर्गों को सांस तक लेने मे दिक्कत हो रही है. ऐसे में जरुरी है कि संसद में इस समस्या से निबटने के उपायों पर बात हो. उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से पूछा कि उनके पास इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए क्या रोडमैप है? सरकार अगले अगले कम से कम चार-पांच साल में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाने वाली है.राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार का क्या रोडमैप है,इसकी जानकारी सदन के सामने रखें.

लाखों लोग जहरीली हवा में जीने के लिए मजबूर – राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि “इस समय देश के अधिकांश बड़े शहर जहरीली हवा की चादर में लिपटे हुए हैं. लाखों बच्चे फेफड़ों की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं. उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है. लोग कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं. बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. ये एक ऐसा मुद्दा है जिसपर चर्चा होनी चाहिये और मुझे पूरा विश्वास है कि कम से कम इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष एक हो कर विचार कर सकते हैं. ये कोई वैचारिक मुद्दा नहीं है. राहुल गांधी ने कहा कि सदन में सभी लोग इस बात से सहमत होंगे कि वायु प्रदूषण और इससे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए हम सभी सहयोग करना चाहेंगे.”

Rahul Gandhi:पक्ष और विपक्ष दोनों को इस मुद्दे का समाधान ढ़ूंढ़ना चाहिये

राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि पॉल्यूशन का कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए. एक दूसरे को ब्लेम करने की बजाय हम कोई सॉल्यूशन ढूंढें. सरकार और विपक्ष बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा करें. उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर हर शहर में प्रदूषण से निपटने के लिए अलग-अलग प्लान बनाए. उन्होंने प्रधानमंत्री से इसके लिए पहल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि संसद में प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, जिसमें विपक्ष और सत्ता पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय साथ मिलकर देशहित में एक ठोस प्लान को अंतिम रूप दें.

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