अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सफाई देते हुए बताया है कि आखिर अमेरिका ने हाल ही में साउथ अफ्रीका में हुई G20 समिट में हिस्सा क्यों नहीं लिया. साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले साल जब अमेरिका G20 की अध्यक्षता करेगा, तब साउथ अफ्रीका को आमंत्रण ही नहीं भेजा जाएगा. इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने साउथ अफ्रीका की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए |
उन्होंने लिखा कि अफ्रीकानर्स और डच, फ्रेंच, जर्मन मूल के बसने वालों पर मानवाधिकार उल्लंघन हो रहे हैं. ट्रंप ने दावा किया, ‘साफ शब्दों में कहूं तो वे श्वेत लोगों को मार रहे हैं और उनकी जमीन छीनने रहे हैं.’ यह वही पुराना आरोप है जिसे ट्रंप पहले भी कई बार दोहरा चुके हैं, हालांकि साउथ अफ्रीकी सरकार और व्हाइट समुदाय के कई नेताओं ने इसे पहले भी खारिज किया है |
G20 समिट में अमेरिका क्यों नहीं गया?
G20 समिट पिछले हफ्ते जोहान्सबर्ग में हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वैश्विक नेता मौजूद थे. अमेरिका ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस बार समिट में हिस्सा नहीं लेगा. अब ट्रंप ने कहा कि साउथ अफ्रीका जमीन पर हो रहे अत्याचारों पर चुप है, इसलिए अमेरिका ने दूरी बनाई |
दक्षिण अफ्रीका को G20 में क्यों नहीं बुलाएंगे ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी कहा है कि वह अमेरिका में होने वाले G20 में साउथ अफ्रीका को नहीं बुलाने वाले हैं. इसका उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने औपचारिक रूप से अध्यक्षता नहीं सौंपी थी. उन्होंने पोस्ट में लिखा,’जी-20 के समापन पर, दक्षिण अफ्रीका ने हमारे अमेरिकी दूतावास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को जी-20 की अध्यक्षता सौंपने से इनकार कर दिया, जो समापन समारोह में उपस्थित थे. इसलिए, मेरे निर्देश पर, दक्षिण अफ्रीका को 2026 के जी-20 का निमंत्रण नहीं मिलेगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष फ्लोरिडा के मियामी शहर में होगा |
साउथ अफ्रीका ने क्यों नहीं सौंपी G20 की अध्यक्षता?
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने अमेरिका को अध्यक्षता नहीं सौंपी थी. इसका कारण भी दक्षिण अफ्रीका ने बताया था. दक्षिण अफ्रीका ने कहा था कि राष्ट्रपति किसी को भी अध्यक्षता नहीं दे सकते. ऐसा नहीं हो सकता कि अमेरिका किसी भी अधिकारी को भेजे और राष्ट्रपति उसे अध्यक्षता देंगे. अमेरिका को उनके ही लेवल का नेता भेजना चाहिए था न कि दूतावास का कोई अधिकारी. दक्षिण अफ्रीका ने कहा था कि उनके विदेश मंत्रालय का कोई अधिकारी जल्द ही दूतावास में जाकर अध्यक्षता दे देगा |
ट्रंप के फैसले पर क्या बोला दक्षिण अफ्रीका?
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि यह फैसला निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश करती रही है. साउथ अफ्रीका की विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के दावे को गलत बताते हुए कहा कि चूंकि अमेरिका का कोई प्रतिनिधि समिट में मौजूद नहीं था, इसलिए G20 की अध्यक्षता का प्रतीक चिह्न (गैवल) अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को बाद में उनके मंत्रालय के मुख्यालय में सौंप दिया गया था |
क्या दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों पर हमले हो रहे हैं?
ट्रंप का यह दावा नया नहीं है. वह कई बार कह चुके हैं कि साउथ अफ्रीका में व्हाइट अल्पसंख्यक ‘उत्पीड़न और हमलों’ का शिकार हैं. लेकिन इन दावों को साउथ अफ्रीकी सरकार, स्वतंत्र संस्थाओं और व्हाइट किसानों के कई प्रतिनिधियों ने भी तथ्यहीन बताया है. स्थानीय अध्ययनों में पाया गया है कि हिंसा का पैटर्न व्यापक है और यह पूरी आबादी को प्रभावित करता है, न कि किसी एक समूह को लक्ष्य बनाकर |

