गया:अभिषेक झा, ब्यूरोचीफ कहते हैं कि जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी. और ये बात बिहार की राजनीति में जीतन राम मांझी पर बिल्कुल ठीक बैठती है. पूरी दुनिया के बौद्ध धर्म अनुयायी बिहार के बोधगया में सत्य अहिंसा और सात्विक विचारों की खोज के लिए आते हैं लेकिन बिहार के राजनेता अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में ये भूल जाते हैं कि वो कहां पर खड़े होकर क्या बोल रहे हैं. शनिवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी ने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री को सलाह दी कि अगर वो राज्य में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें बोधगया में पर्यटकों के खाने और पीने का प्रबंध करना होगा. जीतनराम मांझी ने कहा कि यहां पर्यटक इसीलिए नहीं टिकते हैं क्योंकि क्योंकि उन्हें यहां सब कुछ खाने और पीने नहीं मिलता है. मांझी यहां कालचक्र मैदान में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.
ये कैसी दलील …….
शराबबंदी हटाने के लिए जीतन राम की दलील..
बोधगया अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल कहने से नहीं, बल्कि विदेशी मेहमानों को खाने-पीने के चीज को प्रबंध करने से होगा, कोई भी बाहर के पर्यटक यहां रुक नहीं रहे हैं@jitanrmanjhi @NitishKumar @yadavtejashwi pic.twitter.com/7ryl4E6RAK— THEBHARATNOW (@thebharatnow) January 28, 2023
खाने-पीने की चीज का प्रबंध करने से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनेगा बोधगया
जीतन राम मांझी ने शराबबंदी हटाने पर जोर देते हुए कहा कि बोधगया को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल केवल कह देने भर से बात नहीं बनेगी बल्कि विदेशी मेहमानों के खाने-पीने की चीज का प्रबंध करने से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनेगा. कोई भी बाहर के पर्यटक यहां रुक नहीं रहे हैं. यहां थोड़ी देर घूमकर सीधे बनारस और पड़ोसी राज्य झारखंड के हजारीबाग जा रहे हैं. ऐसे में विदेशी मुद्रा से राजस्व कैसे बढेगा?
पूर्व मुख्यमंत्री मांझी ने कहा कि हम सीएम नीतीश जी से अंदर-अंदर ही शराबबंदी को समाप्त करने के लिए मांग करेंगे और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव जी से भी कह रहे हैं कि इसे समाप्त करने के लिए उन्हें कहें.
ये पहला मौका नहीं है जब जीतन राम मांझी ने खुल कर शराबबंदी पर से रोक हटाने के लिए आवाज उठाई है. इससे पहले भी उन्होंने कई बार कहा है कि थोड़ा बहुत शराब का सेवन बुरा नहीं है.
दुनिया भर में बोध गया का महत्व भगवान बुद्ध के ज्ञान की धरती के रूप में है. सत्य अहिंसा,सात्विक आहार,सात्विक विचार के वाहक भगवान बुद्ध ने अपनी शिक्षा में सदैव तामसिक भोजन और उग्र विचारों का विरोध किया है. उन भगवान बुद्ध की धरती पर शराब सेवन की मांग की बात कह कर पूर्व सीएम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है .सवाल ये है कि पूरी दुनिया से यहां भगवान बुद्ध की धरती को नमन करने आने वाले अनुयायी और पर्यटक क्या ऐसी सलाह का स्वागत करेंगे ?

