मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान पर राज ठाकरे द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी का यह मार्च संविधान और देश की रक्षा के लिए है, न कि सत्ता परिवर्तन के लिए।
राज ठाकरे का तंज और केएफसी का उदाहरण
मुंबई के एक कार्यक्रम के दौरान मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भाजपा के अभियान पर तीखा कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा था कि सिर्फ कुर्सी हासिल कर लेने से कुछ नहीं होता, बल्कि सत्ता की मानसिकता व्यक्ति के मन में भी होनी चाहिए। राज ठाकरे ने भाजपा की इस मुहिम की तुलना केएफसी के प्रतीक से करते हुए तंज कसा था कि जैसे कोई व्यक्ति मुर्गियों को बचाने की अपील करे, वैसी ही स्थिति सत्तारूढ़ दल की है जो खुद सत्ता में होने के बावजूद लोकतंत्र बचाने के लिए मार्च निकाल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए सवाल किया था कि आखिर यह मार्च किसके खिलाफ निकाला जा रहा है।
फडणवीस का पलटवार, बोले- संविधान बचाने के लिए है मार्च
राज ठाकरे के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यदि राज ठाकरे उनके अभियान के वास्तविक उद्देश्य को समझ लें, तो शायद ऐसी टिप्पणी न करें। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए फडणवीस ने दो टूक कहा कि उनके मार्च अराजकता और संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ हैं।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) के नाम पर देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं और उनका यह सत्ता परिवर्तन वास्तव में संविधान को बदलने का प्रयास है। इसी षड्यंत्र को विफल करने के लिए भाजपा सड़कों पर उतरी है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राहुल गांधी के साथ जितने लोग हैं, उससे कहीं अधिक संख्या में देश की जनता भारतीय लोकतंत्र और संविधान के समर्थन में मजबूती से खड़ी है।

