हैदराबाद। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के पौत्र और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता एनवी सुभाष ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों और कार्यशैली की कटु आलोचना की है। उन्होंने राहुल गांधी की गतिविधियों को देश की साख को नुकसान पहुंचाने वाला करार देते हुए आरोप लगाया कि वे अपनी विदेशी यात्राओं के दौरान भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को धूमिल करने का प्रयास करते हैं। एनवी सुभाष ने दावा किया कि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों से पूर्व देश के संवैधानिक ढांचे, स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
विदेश दौरों और बयानबाजी पर खड़े किए गंभीर सवाल
एनवी सुभाष ने कहा कि जब भी विपक्ष के मुख्य नेता विदेश जाते हैं तो वहां से वे एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की तरह सरकार की नीतियों पर बात करने के बजाय देश के संविधान, चुनाव आयोग और पूरी न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि एक परिपक्व और उत्तरदायी विपक्षी नेता का मुख्य कर्तव्य देश के भीतर रहकर आम जनता तथा कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कायम रखना होता है। एनवी सुभाष ने दावा किया कि जनता सब समझ रही है और आगामी चुनावों में मतदाता इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी का उचित जवाब देंगे।
चुनावी हार से पहले बहाना बनाने का लगाया आरोप
विपक्ष पर सामाजिक ताने-बाने और संवेदनशील भावनाओं से खेलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए भ्रम का वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आने वाले विधानसभा चुनावों में अपनी पराजय को देखते हुए अभी से ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और पूरी चुनावी प्रणाली पर अविश्वास व्यक्त किया जा रहा है ताकि हार का ठीकरा चुनाव व्यवस्था पर फोड़ा जा सके। एनवी सुभाष के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाना जनता के जनादेश का अनादर करने जैसा है।
संसदीय मर्यादा और पूर्व नेताओं के आचरण का दिया हवाला
राहुल गांधी को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की सलाह देते हुए भाजपा नेता ने आग्रह किया कि उन्हें भारतीय राजनीति में पूर्ववर्ती विपक्षी नेताओं द्वारा स्थापित उच्च संसदीय मर्यादाओं और आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में कांग्रेस पार्टी सहित विभिन्न दलों में अनेक दिग्गज नेता रहे हैं जिन्होंने विपक्ष के नेता पद की गरिमा को हमेशा ऊंचा रखा है। उन्होंने बल देकर कहा कि देश की शीर्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों का सम्मान करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का बुनियादी दायित्व है।

