CEC के खिलाफ विपक्ष का अनोखा विरोध, मीरा कुमार ने पंडित नेहरू की कुर्सी पर बैठकर जताया विरोध

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध एक प्रतीकात्मक 'जनता का महाभियोग' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अनूठे व प्रतीकात्मक आयोजन की अध्यक्षता देश की पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि मीरा कुमार जिस ऐतिहासिक कुर्सी पर विराजमान होकर पूरी कार्यवाही का संचालन कर रही थीं, वह कभी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की हुआ करती थी। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटनाक्रम की जानकारी साझा की। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हुए ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और उन पर कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग उठाई।

नेहरू की ऐतिहासिक कुर्सी पर बैठकर मीरा कुमार ने निभाई अध्यक्ष की भूमिका

पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर विवरण साझा करते हुए बताया कि जिस ऐतिहासिक कुर्सी पर आसीन होकर पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग की प्रक्रिया संचालित की, वह स्वतंत्र भारत के इतिहास के अनेक युगनिर्माता निर्णयों की साक्षी रही है। उन्होंने कहा कि इसी ऐतिहासिक कुर्सी पर बैठकर मीरा कुमार ने ज्ञानेश कुमार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर बने रहने के लिए सर्वथा अयोग्य घोषित किया। उन्होंने यह दावा भी किया कि देश की जागरूक जनता मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली को खारिज कर चुकी है और अब उनका पद से हटना महज औपचारिकता एवं समय की बात रह गई है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रस्तुत किया प्रस्ताव और राहुल गांधी का वक्तव्य

विपक्षी गठबंधन का यह बहुचर्चित आयोजन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सरकारी आवास के प्रांगण में संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों, दिग्गज नेताओं और नागरिक समाज के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस पूरे कार्यक्रम की संरचना बिल्कुल संसदीय कार्यवाही की तर्ज पर तैयार की गई थी, जिसके अंत में एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि वर्तमान दौर में आम नागरिकों का मूलभूत संवैधानिक मताधिकार खतरे में पड़ गया है और संवैधानिक संस्थाएं केंद्र में सत्तारूढ़ शीर्ष नेतृत्व के इशारों पर कार्य कर रही हैं। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रतीकात्मक महाभियोग को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हथियार की संज्ञा देते हुए कहा कि यह उन ताकतों के खिलाफ जनता की आवाज है जिन्होंने देशवासियों के वोट की ताकत को कमजोर करने की साजिश की है।

मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप और कानूनी कार्रवाई की मांग

विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावों के दौरान मतदाता सूचियों से नाम हटवाकर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए। इंडिया गठबंधन के प्रतिनिधियों ने मांग रखी कि उनके खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। यद्यपि, यह संसद के भीतर संचालित होने वाली वास्तविक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि विपक्ष द्वारा जनमानस के समक्ष आयोजित की गई एक सांकेतिक एवं प्रतीकात्मक सार्वजनिक कार्यवाही थी।

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