नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची ऐतिहासिक बगावत के बाद अब देश की राजधानी में केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) के संभावित फेरबदल और विस्तार को लेकर सियासी सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले बागी सांसदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) सरकार में बड़ी जगह मिल सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बंगाल में टीएमसी को पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए एनडीए इन बागी नेताओं को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल कर इनाम दे सकती है।
कैबिनेट विस्तार में सुदीप बंदोपाध्याय और प्रसून बनर्जी के नाम रेस में
राजनीतिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि टीएमसी से अलग होकर 'राष्ट्रवादी सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय करने वाले बागी गुट के दो कद्दावर सांसदों को मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।
पहला बड़ा नाम: पूर्व केंद्रीय मंत्री और ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय का है, जिन्होंने शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद बागी खेमे की कमान संभाली थी।
दूसरा बड़ा नाम: हावड़ा से लोकसभा सांसद और पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर प्रसून बनर्जी (स्रोतों में 'सरकार पूर्वी/हावड़ा' के संदर्भ में इंगित) का है। इन्हें एनडीए सरकार में खेल या अन्य महत्वपूर्ण राज्य मंत्री का प्रभार सौंपा जा सकता है।
NDA में बढ़ा NCPI का कद, काकोली घोष की बड़ी भूमिका
हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों के बागी गुट ने खुद को गैर-मान्यता प्राप्त दल NCPI में विलय करने का ऐलान किया था। इस पूरे खेल की मुख्य सूत्रधार और बागी गुट की चीफ व्हिप डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि दो और सांसद उनके संपर्क में हैं, जिससे बागियों की संख्या 22 हो जाएगी। दो-तिहाई से अधिक संख्या होने के कारण दल-बदल कानून से सुरक्षित यह गुट अब एनडीए का एक बेहद महत्वपूर्ण और पांचवां सबसे बड़ा सहयोगी घटक दल बनकर उभरा है, जिसे कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलना तय माना जा रहा है।
राज्यसभा में भी ढही टीएमसी, सुखेंदु और सुष्मिता देव के इस्तीफे
लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी ममता बनर्जी की पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के दो बेहद प्रखर और वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव ने उच्च सदन की सदस्यता और पार्टी से पूरी तरह इस्तीफा दे दिया है। सुष्मिता देव ने इस्तीफा देने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भी मुलाकात की है। इन इस्तीफों के बाद राज्यसभा में टीएमसी की संख्या बल काफी घट गई है। चूंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के पास 208 विधायकों की प्रचंड ताकत है, इसलिए इन खाली हुई राज्यसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों में भाजपा (NDA) की एकतरफा जीत तय है, जिससे उच्च सदन का पूरा समीकरण बदल जाएगा।
शाह, राजनाथ और नड्डा की आपात बैठक
इस बीच, बंगाल में मचे इस अभूतपूर्व सियासी भूचाल और संभावित कैबिनेट फेरबदल की रूपरेखा तैयार करने के लिए दिल्ली में एक हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने बंद कमरे में घंटों मंथन किया। हालांकि, पार्टी ने इस बैठक के एजेंडे को लेकर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो बहुत जल्द ही राष्ट्रपति भवन में नए केंद्रीय मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह देखने को मिल सकता है।

