ममता की 2021 की चोट पर फिर घमासान, शुभेंदु ने रिपोर्ट दिखाकर उठाए सवाल

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा सार्वजनिक की गई एक जांच रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अधिकारी ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान पैर टूटने का झूठा दावा करने का आरोप लगाया है। बता दें कि नंदीग्राम, पूर्व मेदिनीपुर जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र है।

शुभेंदु अधिकारी द्वारा रिपोर्ट सार्वजनिक करने के बाद टीएमसी का सवाल

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए यह गंभीर आरोप लगाया और साथ ही 11 मार्च 2021 की बांगुर तंत्रिका विज्ञान संस्थान की जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक की। इसके कुछ ही घंटों के भीतर तृणमूल कांग्रेस ने इस रिपोर्ट की प्रामाणिकता और सत्यता को चुनौती दे दी। उत्तर कोलकाता की बेलीघाटा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इसे कटघरे में खड़ा किया।

क्या रिपोर्ट के साथ की गई है छेड़छाड़? कुणाल घोष का बयान

पत्रकार से नेता बने कुणाल घोष ने सीधे तौर पर यह आशंका जताई कि इस रिपोर्ट में छेड़छाड़ की गई हो सकती है। उन्होंने कहा कि चूँकि पश्चिम बंगाल में इस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है, ऐसे में ऐसी रिपोर्टों की प्रामाणिकता पर संदेह होना पूरी तरह स्वाभाविक है। कुणाल घोष ने यह भी तर्क दिया कि जब किसी व्यक्ति को चोट लगती है, तो इलाज की प्रक्रिया डॉक्टर तय करते हैं कि टांग पर पट्टी बांधी जानी है या फ्रैक्चर मानकर प्लास्टर करना है। उन्होंने अधिकारी पर ममता बनर्जी को व्यक्तिगत रूप से बदनाम करने का आरोप लगाया।

ऋतब्रत बनर्जी का तंज और 2021 के चुनाव का घटनाक्रम

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें आम लोगों को गुमराह करने के लिए एक विशेष पुरस्कार दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें यह पुरस्कार मिलना चाहिए। आपको बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में प्रचार करते वक्त ममता बनर्जी के घायल होने की खबर आई थी, जिसके बाद वह प्लास्टर और व्हीलचेयर पर नजर आई थीं। उस चुनाव में उन्हें शुभेंदु अधिकारी ने हराया था, जिसके बाद उन्होंने भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा था। अब इस पुराने मामले में रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

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