Thursday, February 19, 2026

सत्ता का एक साल भी पूरा नहीं कर पाएंगे यूनुस? संकेत हो रहे स्पष्ट

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया डॉ. मोहम्मद यूनुस को सत्ता संभाले अभी साल भर भी नहीं हुए हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय की अंदरूनी कलह और लगातार बढ़ती अव्यवस्था ने उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यूनुस की तेज़ रफ्तार और निर्णायक शैली को जहां एक ओर उनके कुछ करीबी समर्थक सुधार की कोशिश बता रहे हैं, वहीं मंत्रालय के अंदर उनके सलाहकारों और सचिवों के साथ बढ़ती टकराव की स्थिति ने शासन व्यवस्था की नींव हिला दी है. मंत्रालय के भीतर फैसले लटक रहे हैं, सलाहकार एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं और विदेश नीति में दिशा की कमी साफ झलक रही है.

सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के शीर्ष स्तर पर चल रही खींचतान का केंद्र बने हैं विदेश सचिव मो. जसीम उद्दीन और सलाहकार तौहीद हुसैन. दोनों के बीच समन्वय की भारी कमी देखी जा रही है. बताया जा रहा है कि निर्णय प्रक्रिया में सुस्ती और कुछ मामलों में गलत फैसलों के चलते कई कूटनीतिक पहल अधर में लटक गए हैं. मंत्रालय के अंदरूनी सूत्र इसे डेडलॉक की स्थिति बता रहे हैं, जिससे नीतिगत फैसलों पर असर पड़ा है.

डैमेज कंट्रोल में यूनुस, लेकिन टीम में ही असहमति
मंत्रालय की बिगड़ती तस्वीर को सुधारने के लिए डॉ. मोहम्मद यूनुस ने लुत्फे सिद्दिकी, खालिलुर रहमान और सूफिउर रहमान जैसे अनुभवी नामों को ज़िम्मेदारियां दीं. इनमें से खालिलुर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सूफिउर को विदेश राज्य मंत्री जैसा दर्जा मिला. लेकिन यूनुस के इन कदमों को भी मंत्रालय के अंदर ही चुनौती मिलने लगी. खुद तौहीद हुसैन और सचिव जसीम उद्दीन ने सूफिउर की नियुक्ति पर आपत्ति जताई, जिससे हालात और उलझ गए.

जापान दौरे से पहले बड़ी बैठक टली, उठा सवाल
मुख्य सलाहकार यूनुस की प्रस्तावित जापान यात्रा से ठीक पहले विदेश मंत्रालय की एक अहम सलाहकार बैठक को अचानक टाल दिया गया. यह फैसला कूटनीतिक हलकों में चिंता का कारण बना. बाद में मामला किसी तरह सुलझा, लेकिन इससे मंत्रालय में असहमति और अंदरूनी कलह की तस्वीर सार्वजनिक हो गई.

सचिव के हटने की चर्चा, नेतृत्व परिवर्तन तय?
इन घटनाओं के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि सरकार विदेश सचिव मो. जसीम उद्दीन को हटाने की योजना बना चुकी है. खुद जसीम एक “सम्मानजनक विदाई” की तलाश में हैं, लेकिन विदेश में राजदूत पद जैसे विकल्पों की फिलहाल उपलब्धता न होने से उनकी अगली भूमिका को लेकर संशय बना हुआ है. मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना अब बेहद प्रबल मानी जा रही है.

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