दूध रखने का तरीका इतना अलग क्यों? अमेरिका बनाम यूरोप की पूरी कहानी

वाशिंगटन। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में दूध को हमेशा फ्रिज (रेफ्रिजरेटर) के अंदर रखा जाता है, जबकि कई यूरोपीय देशों में इसे सामान्य अलमारियों या शेल्फ पर कमरे के तापमान पर क्यों बेचा जाता है? पहली नजर में यह अंतर काफी हैरान करने वाला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की मुख्य वजह दूध को प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और पाश्चराइज करने की अलग-अलग पद्धतियां हैं।

अमेरिका और कनाडा की एचटीएसटी तकनीक

अमेरिका और कनाडा में डेयरी उद्योग मुख्य रूप से 'हाई टेम्प्रेचर शॉर्ट टाइम' (HTST) पाश्चराइजेशन तकनीक पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया में दूध को बेहद कम समय के लिए एक निश्चित उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे उसमें मौजूद नुकसानदेह बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इस विधि से तैयार दूध की शेल्फ लाइफ औसतन 7 से 10 दिनों की ही होती है और इसे खराब होने से बचाने के लिए लगातार ठंडा (रेफ्रिजरेट) रखना अनिवार्य होता है।

यूरोप में अपनाई जाने वाली यूएचटी विधि

इसके विपरीत, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में 'अल्ट्रा हाई टेम्प्रेचर' (UHT) पाश्चराइजेशन तकनीक का प्रचलन सबसे ज्यादा है। इस प्रक्रिया में दूध को बहुत ही ज्यादा ऊंचे तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे सभी सूक्ष्मजीव पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। एसेप्टिक पैकेजिंग के साथ, बंद यूएचटी दूध के पैकेट को बिना फ्रिज के भी महीनों तक कमरे के तापमान पर सुरक्षित रखा जा सकता है। हालांकि, पैकेट खुलते ही इसे सामान्य दूध की तरह फ्रिज में रखना और जल्द इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है।

अमेरिका में यूएचटी दूध का कम चलन और वजहें

जब यूएचटी दूध इतना सुविधाजनक और लंबे समय तक चलने वाला है, तो अमेरिका में इसे व्यापक रूप से क्यों नहीं अपनाया गया? इसकी पहली वजह स्वाद है; अत्यधिक तापमान पर गर्म किए जाने से यूएचटी दूध का स्वाद थोड़ा पका हुआ या उबला हुआ सा हो जाता है, जिसे अमेरिकी उपभोक्ता ज्यादा पसंद नहीं करते। दूसरी वजह वहां के लोगों की ठंडे दूध के इस्तेमाल की आदत है।

अतः यूरोप के सुपरमार्केट में सामान्य शेल्फ पर रखा दूध पूरी तरह सुरक्षित होता है और यह केवल अलग तकनीक तथा जनसांख्यिकीय प्राथमिकताओं का परिणाम है।

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