Sunday, February 22, 2026

कतर और बहरीन के मिलिट्री बेस खाली कर रही अमेरिकी सेना? सैकड़ों सैनिकों को निकाला

वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच गहराते तनाव के बीच मध्य पूर्व के सामरिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में संभावित सैन्य कार्रवाई की आहट अब जमीन पर भी दिखाई देने लगी है। कतर के अल उदैद एयर बेस और बहरीन में स्थित महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकानों से सैकड़ों सैनिकों को बाहर निकाला गया है। बहरीन, जो अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (फिफ्थ फ्लीट) का मुख्य केंद्र है, वहां से सैनिकों की यह आवाजाही पेंटागन द्वारा एहतियाती कदम बताई जा रही है। हाल ही में सीरिया से भी अमेरिकी सैन्य टुकड़ियों की वापसी की खबरें आई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ईरान के विरुद्ध किसी भी संभावित टकराव से पहले अपने संसाधनों को सुरक्षित और पुनर्गठित कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि वे ईरान पर सीमित सैन्य हमले के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं। एक हालिया बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परमाणु कार्यक्रम पर निर्धारित समय सीमा के भीतर समझौता नहीं होता है, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। कुछ रणनीतिक रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि यदि सैन्य कार्रवाई होती है, तो ईरान के शीर्ष नेतृत्व को सीधे तौर पर लक्षित किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को अपनी नीतियों में सुधार के लिए 10 से 15 दिन का समय दिया है, जिसे एक अंतिम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने इस दबाव के बीच कूटनीति का रास्ता भी खुला रखा है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि उनका देश अगले दो से तीन दिनों में परमाणु समझौते का एक नया मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कर लेगा। अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए साक्षात्कार में संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान शांति और युद्ध, दोनों ही स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक सप्ताह के भीतर इस मसौदे पर गंभीर बातचीत शुरू हो सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक तरफ भारी सैन्य लामबंदी हो रही है और दूसरी तरफ संकट टालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

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