ट्रंप की ईरान को धमकी: 3 दिन में समझौता नहीं हुआ तो तेल पाइपलाइनों को तबाह कर देंगे

Trump Threatens Iran , वॉशिंगटन : ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अगले तीन दिनों के भीतर ईरान परमाणु और क्षेत्रीय मुद्दों पर समझौता नहीं करता है, तो उसकी तेल पाइपलाइनों को भीषण विस्फोटों के जरिए नष्ट कर दिया जाएगा. ट्रंप का यह कड़ा बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की रूस यात्रा के बीच आया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मच गई है.

Trump Threatens Iran:’शर्त नहीं मानी तो पाइपलाइन नेटवर्क को करेंगे ध्वस्त’

एक अंतरराष्ट्रीय चैनल को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका की सख्त नाकेबंदी के कारण ईरान पहले ही जहाजों के जरिए तेल निर्यात करने में असमर्थ है. अब यदि पाइपलाइन नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया, तो ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो जाएगा और वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने के लायक भी नहीं बचेगा. ट्रंप ने धमकी दी कि पाइपलाइनों को इस तरह तबाह किया जाएगा कि ईरान उन्हें दोबारा बनाने की स्थिति में नहीं रहेगा.

अराघची के रुस दौरे से भड़का अमेरिका 

तनाव की ताजा कड़ी ईरान के विदेश मंत्री अराघची का रूस दौरा है. इससे पहले वे अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता की उम्मीद में पाकिस्तान गए थे, लेकिन ट्रंप ने अपना प्रतिनिधिमंडल वहां भेजने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद अराघची ओमान और फिर रूस की यात्रा पर निकल गए, जहां वे राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात कर वार्ता की रूपरेखा पर चर्चा करेंगे. ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टीम अब पाकिस्तान नहीं जाएगी, अब जो भी बातचीत होगी, वह केवल फोन पर होगी. ईरान ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप को एक लिखित प्रस्ताव भी भेजा था, जिसे राष्ट्रपति ने तुरंत खारिज कर दिया. हालांकि, ट्रंप ने दावा किया कि पहले प्रस्ताव के मुकाबले ईरान ने अब एक दूसरा, बेहतर प्रस्ताव भेजा है. उन्होंने कहा कि वार्ता के लिए इधर-उधर सफर करने की जरूरत नहीं है, ईरान जब चाहे उन्हें फोन कर सकता है.

रुस के साथ मिलकर युद्ध खत्म करने पर करेंगे चर्चा- ईरान 

दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि वे मॉस्को में रूस के साथ मिलकर युद्ध समाप्त करने और शांति बहाली के ढांचे पर चर्चा करेंगे. 11 और 12 अप्रैल को हुई शांति वार्ता के पहले दौर की विफलता के बाद अब वैश्विक नजरें ट्रंप की तीन दिन की समय सीमा और रूस-ईरान की अगली रणनीतिक चाल पर टिकी हैं.

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