पाक अधिकृत कश्मीर में सुलगी बगावत की चिंगारी, इस्लामाबाद की नीतियों पर सवाल

मुजफ्फराबाद/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आजादी और नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर भारी जन-असंतोष पैदा हो गया है। पाकिस्तानी प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे हिंसक दमन के बावजूद स्थानीय नागरिकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है, जिससे पाकिस्तान की कश्मीर नीति का दोहरा चरित्र वैश्विक स्तर पर उजागर हो गया है।

चुनावी धांधली और जेएएसी का बहिष्कार

हाल ही में मीरपुर डिवीजन में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा दिए गए चुनाव बहिष्कार के आह्वान का व्यापक असर देखने को मिला, जिससे मतदान प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से बेहद कम रहा। इसके बावजूद पाकिस्तान की संघीय सत्ता में शामिल 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज' (PML-N) और 'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' (PPP) ने अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की। स्थानीय जनता और विश्लेषकों ने इस पूरी प्रक्रिया को सेना व खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) द्वारा प्रायोजित एक पूर्व-निर्धारित राजनीतिक नाटक करार दिया है।

सुरक्षा बलों की बर्बरता: 70 तक पहुंची मृतकों की संख्या

जनआंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा निहत्थे नागरिकों पर सीधी गोलीबारी की जा रही है।

  • ताजा हिंसा: महज तीन दिनों के भीतर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 33 प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है।

  • कुल हताहत: 5 जून से शुरू हुए इस आंदोलन में अब तक 60 से 70 के करीब नागरिकों की मौत हो चुकी है।

अपनी 38-सूत्रीय मांगों को लेकर जेएएसी के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर कूच कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारी "हम क्या चाहते- आजादी" के नारे लगा रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि इस आंदोलन को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के शेष बचे सदस्यों सहित विभिन्न राष्ट्रवादी गुटों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।

भारत पर मढ़ने की कोशिश और प्रोपेगैंडा बेअसर

पाकिस्तान सरकार ने जनआक्रोश को दबाने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने, मीडिया कवरेज को पूरी तरह रोकने और जेएएसी को भारत का 'पिट्ठू' साबित करने के प्रयास किए। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस अशांति के लिए सीधे तौर पर भारत को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन यह रणनीति पूरी तरह विफल साबित हुई है।

हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तानी सेना अपने पुराने प्रॉक्सी संगठनों—जैसे 'ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस' (PoJK चैप्टर) और 'यूनाइटेड जिहाद काउंसिल'—के जरिए भी इस आंदोलन को शांत करने या भटकाने में असमर्थ रही है।

पाकिस्तान का बेनकाब होता दोहरा मापदंड

इन विरोध प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आत्मनिर्णय के अधिकार की वकालत करने वाले पाकिस्तान के दोहरे रवैये की कलई खोल दी है। जो आजादी-समर्थक नारे कभी श्रीनगर में लगाए जाने पर इस्लामाबाद उनका समर्थन करता था, आज वही नारे उसके अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में गूंज रहे हैं, जिससे पाकिस्तानी तंत्र के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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