एस. जयशंकर ने बताया क्वाड का विजन, आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक विकल्पों पर दिया जोर

अटलांटा। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को क्वाड समूह के मंच से वैश्विक प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए 'चुनने की स्वतंत्रता', मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के निर्माण और गैर-बाजार प्रथाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने को इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बताया। इसके साथ ही उन्होंने हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के अनुरूप क्वाड के एजेंडे को अधिक व्यावहारिक और समकालीन दृष्टिकोण प्रदान करने पर बल दिया। अटलांटा में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक के उपरांत विदेश मंत्री ने अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्षीय नेताओं के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के प्रमुख बिंदुओं को साझा किया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और मजबूत सप्लाई चेन पर जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के प्रमुख निष्कर्षों को रेखांकित करते हुए कहा कि संपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखना, आर्थिक समृद्धि को गति देना और राष्ट्रों के लिए चुनने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना क्वाड की अटूट प्रतिबद्धता है। उन्होंने प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्रों में किसी एक देश पर निर्भरता घटाने के लिए सुरक्षित तथा आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखला बनाने की आवश्यकता जताई। इसके अतिरिक्त, उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आतंकवाद विरोधी अभियानों, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण से जुड़ी मौजूदा साझेदारियों को और अधिक गति देने का आह्वान किया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कचरे से खनिज निष्कर्षण हेतु वित्तीय सहयोग

तकनीकी क्रांति के इस दौर में क्वाड के सदस्य देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विश्वसनीय और सुरक्षित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीकों की पहुंच सुलभ कराने के लिए 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया है। इसके अंतर्गत 'क्वाड एआई एक्सेलेरेटर' के माध्यम से भी सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, भारत और आसियान देशों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे और कबाड़ से महत्वपूर्ण खनिजों को निकालने की अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित करने के लिए अमेरिका द्वारा 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर के योगदान का स्वागत किया गया। क्वाड के चारों घटक देश रणनीतिक रूप से ई-कचरे के पुनर्चक्रण को सुगम बनाकर महत्वपूर्ण संसाधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु नियमों को सरल बनाने पर विचार कर रहे हैं।

ऊर्जा आपूर्ति के राजनीतिकरण पर भारत का कड़ा रुख और जी20 में स्पष्ट संदेश

अटलांटा में ही आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारतीय पत्रकारों से संवाद करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक अन्य बड़े मुद्दे पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति का राजनीतिकरण करना अत्यंत घातक है, जिसका सबसे विपरीत और विनाशकारी प्रभाव विकासशील देशों यानी 'ग्लोबल साउथ' पर पड़ रहा है। जयशंकर ने जी20 समूह के मंच से इस गंभीर संकट को स्वीकार करने और व्यावहारिक समाधान निकालने का आग्रह किया। उन्होंने इस जी20 बैठक को अत्यंत सार्थक, पारदर्शी और दूरगामी निर्णयों की दिशा में एक जीवंत पहल करार दिया।

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