परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख कायम, रेजाई ने अमेरिका को लेकर जताई अनिश्चितता

तेहरान। ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से पृथक होने के विषय पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। ईरान के एक उच्चस्तरीय सुरक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी आगामी निर्णय संयुक्त राज्य अमेरिका के रवैये एवं भावी नीतियों पर निर्भर करेगा।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि उनका देश अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा जारी उस धार्मिक आदेश (फतवे) का पूर्णतः पालन कर रहा है, जिसमें परमाणु हथियारों के निर्माण एवं विकास पर प्रतिबंध लगाया गया है।

पश्चिम एशिया में शांति बहाली हेतु ईरान की शर्तें

मोहसिन रेजाई ने कहा, 'भविष्य की परिस्थितियों के विषय में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।' उन्होंने बल देकर कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए ईरान द्वारा रखी गई शर्तों को स्वीकार करना वाशिंगटन के हित में होगा। ईरान की प्रमुख शर्तों में सभी सैन्य मोर्चों पर गोलाबारी रोकना, ईरान की अवरुद्ध (सीज) वित्तीय परिसंपत्तियों को मुक्त करना तथा देश के विरुद्ध लगाई गई समुद्री नाकाबंदी को समाप्त करना सम्मिलित है।

उन्होंने जानकारी दी कि कतर एवं पाकिस्तान के मध्यस्थों के माध्यम से वार्ता का दौर जारी है और ईरान ने अमेरिका के साथ औपचारिक बातचीत प्रारंभ करने हेतु अपनी शर्तों से उन्हें अवगत करा दिया है।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के विरुद्ध अमेरिकी रणनीति की तैयारी

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) में अपनी कूटनीतिक बैठकों के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को मुख्य एजेंडे में रखने की योजना बना रहे हैं। न्यू यॉर्क में खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों ने तेहरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाली वैश्विक संस्थाओं पर प्रतिबंध कड़े करने के संकेत दिए हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करने के उपरांत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के राष्ट्रप्रमुखों से भेंट करेंगे, जिसमें ईरान केंद्रीय विषय रहेगा। हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधियों की ईरानी अधिकारियों के साथ किसी प्रत्यक्ष मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव एवं युद्धविराम वार्ता का अनिश्चित भविष्य

उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को इजराइल तथा अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्रों पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के उत्तर में ईरान ने मिसाइल एवं ड्रोन के माध्यम से प्रतिशोधी कार्रवाई की थी। इसके साथ ही ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण सुदृढ़ कर लिया था।

तदुपरांत, 18 जून को अमेरिका और ईरान ने पूर्ण युद्धविराम हेतु एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके अंतर्गत अंतिम समझौते पर पहुंचने हेतु 60 दिवस की समयसीमा निर्धारित की गई थी। यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। हालिया कूटनीतिक गतिरोध एवं सैन्य तैयारियों के कारण इन वार्ताओं का भविष्य वर्तमान में अनिश्चित बना हुआ है।

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