काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक विनाशकारी बाढ़ के बाद स्थिति लगातार भयावह बनी हुई है। प्रभावित जिलों से शवों के मिलने का सिलसिला जारी रहने से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 1,404 तक पहुंच गई है। पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 13,700 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 6,150 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
एवलांच के बाद भोटेकोशी नदी में उफान से मची तबाही
यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टान का मलबा खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद सीमावर्ती भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के गांवों, कस्बों, सड़कों, पुलों और कई जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं को तबाह कर दिया। चीनी मीडिया के मुताबिक, सीमा पार चीनी क्षेत्र में भी इस आपदा से 43 लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक लोग लापता हैं।
सर्वाधिक प्रभावित जिले
नेपाल के चितवन जिले में सबसे ज्यादा तबाही दर्ज की गई है। विभिन्न जिलों से बरामद शवों का विवरण इस प्रकार है:
चितवन: 364 शव
नवलपरासी पूर्व: 232 शव
नवलपरासी पश्चिम: 222 शव
अन्य प्रभावित जिले: नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धाडिंग और तनहुं।
शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती; केवल 104 की शिनाख्त
प्रशासन के अनुसार, अब तक बरामद 1,404 शवों में से केवल 104 की ही पहचान हो सकी है, जिन्हें परिजनों को सौंपा गया है। शवों के अत्यधिक सड़ने और क्षत-विक्षत होने के कारण शिनाख्त में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल डीएनए (DNA) जांच के जरिए ही पहचान संभव है, जो एक समय लेने वाली प्रक्रिया है।
चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 5 शव बरामद
रसुवा और नुवाकोट जिलों में जलविद्युत परियोजनाओं के लापता कर्मचारियों की तलाश में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ जुटे हैं। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि भारतीय और नेपाली बचाव दलों ने कई दिनों की मशक्कत के बाद चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग से कीचड़ हटाकर 5 शव बरामद किए हैं। सुरंग के भीतर कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं मिला है।

