मुश्किलों में घिरा पाकिस्तान, फिर भारत का सहारा लेकर कर रहा बयानबाजी

इस्लामाबाद। आंतरिक संकटों, चरमराती अर्थव्यवस्था और देश के भीतर बढ़ते उग्रवाद से घिरे पाकिस्तान की सेना एक बार फिर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए भारत पर मनगढ़ंत आरोप लगाती नजर आई है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा (आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने अपनी सरकार और सुरक्षा बलों की विफलता से ध्यान भटकाने के लिए भारत के खिलाफ बेबुनियाद दावे किए हैं। देश में लगातार हो रही सुरक्षा चूक और खुफिया एजेंसियों की नाकामी के चलते पाकिस्तानी सेना इस वक्त भारी जन-दबाव का सामना कर रही है।

चौतरफा संकट में घिरा पाकिस्तान

वर्तमान में पाकिस्तान गंभीर आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आटे, दाल और बिजली जैसी बुनियादी चीजों की कमी के चलते जनता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। वहीं, बलूचिस्तान प्रांत में दशकों से जारी दमन के विरोध में 'बलूच लिबरेशन आर्मी' ने पाकिस्तानी सेना पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं, और खैबर पख्तूनख्वा का इलाका 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) के उग्रवादी हमलों से दहल रहा है। इन गंभीर हालातों का समाधान खोजने के बजाय पाक नेतृत्व भारत विरोधी एजेंडा चलाने में व्यस्त है।

प्रेस ब्रीफिंग में लगाए बेबुनियाद आरोप

लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने अपनी हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि भारत पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग कर रहा है। पाक सैन्य प्रवक्ता ने यहां तक कह दिया कि उनके सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान भारत समर्थित 54 प्रॉक्सियों (चरमपंथियों) को मार गिराया है। इसके अलावा, उन्होंने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर भी आरोप लगाया कि वह भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा को अस्थिर करने और वहां अशांति फैलाने की बड़ी साजिश रच रही है।

ध्यान भटकाने की पुरानी रणनीति

हमेशा की तरह इस बार भी पाकिस्तान इन गंभीर आरोपों के पक्ष में कोई एक भी ठोस सबूत या दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। पाकिस्तानी जनरल का पूरा ध्यान केवल भारत को घेरने पर ही रहा, जबकि उन्होंने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि उग्रवादी संगठन पाकिस्तान की कड़ी सुरक्षा के बावजूद देश के अंदर इतने बड़े हमलों को अंजाम देने में कैसे कामयाब हो रहे हैं। यह पूरी कवायद पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति को दिखाती है, जहां जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर पड़ोसी देश पर झूठे आरोप लगाना एक आसान रास्ता मान लिया जाता है।

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