Sunday, January 25, 2026

कोरिया के108 बौद्धभिक्षुओं का दल यात्रा पर भारत आया.ये दल 43 में 1100 कि.मी की करेगा पैदल यात्रा

दिल्ली : भारत में आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में कोरिया के 108 बौद्धभिक्षुओं का दल 43 दिनों की तीर्थ यात्रा भारत आया हुआ है. ये दल भारत और नेपाल में 1100 किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा कर बौद्ध स्थलों का यात्रा करेगा.  कोरिया से हर साल बौद्ध तीर्थयात्री भारत आते हैं,लेकिन ये पहला मौका है जब इतना बड़ा दल एक साथ भारत आया है.

SARNATH KOREAN

108 कोरियाई बौद्ध भिक्षुओं का दल सारनाथ पहुंचा

इस यात्रा के लिए 108 कोरियाई बौद्ध भिक्षुओं का दल वाराणसी से सारनाथ पहुंच चुका है और अब धमेख स्तूप पर बौद्धिक रीति रिवाज से पूजा अर्चना करके यात्रा पर निकल रहे हैं. इस यात्रा का आयोजन सांगवोल सोसाइटी कर रही है. ये सोसायटी भारत और नेपाल स्थित बौद्ध स्थलों के लिए पैदल तीर्थ यात्रा का आयोजन करेगी.

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G-20 का आदर्श वाक्य बौद्ध शिक्षा पर आधारित

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार भारत में होने वाले G-20 समिट का आदर्श वाक्य बौद्ध शिक्षाओं के अनुरूप होगा. G-20 समिट का आदर्श वाक्य “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” रहेगा

बौद्धभिक्षुओं की इस यात्रा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस साल भारत और दक्षिण कोरिया आपसी राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल पूरे होने का उत्सव भी मना रहा है.इस तीर्थयात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को बढ़ाना है.

कोरियाई दल भारत के बाद नेपाल भी जायेगा

ये कोरियन दल भारत में उत्तर प्रदेश और बिहार स्थित बौद्ध तीर्थ स्थलों की यात्रा करेंगे और बाद में नेपाल भी जाएंगे.दरअसल इस यात्रा का मकसद भारत में बने बौद्ध सर्किट को दुनिया भर में प्रचारित कऱने का है. इस सर्किट का उद्देश्य पर्यटकों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के बारे में जानने में मदद करना और बुद्ध के जीवनकाल के दौरान उनके पदचिह्नों की खोज करना है. तीर्थयात्रा के दौरान कवर किए जाने वाले स्थलों में भगवान बुद्ध के जन्म से लेकर उनके महानिर्वाण तक का जीवन शामिल है.

NEPAL BUDDHA BODH GAYA

ये कोरियाई दल 9 फरवरी से 23 मार्च, 2023 तक भारत और नेपाल स्थित पवित्र बौद्ध स्थलों के 43 दिनों की यात्रा पर रहेंगे.

‘ओह, वी! ओह लव! ओह, लाइफ!’ के नारे के साथ सांगवोल सोसायटी द्वारा आयोजित तीर्थयात्रा का उद्देश्य भारत की तीर्थयात्रा के माध्यम से भक्ति संबंधी गतिविधियों की बौद्ध संस्कृति का प्रसार करना है, जहां बुद्ध का जीवन और पदचिह्न संरक्षित हैं.

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