PRAGATI-50 Initiative दिल्ली : उत्तराखंड के लिए शहरी स्वच्छता के मोर्चे पर बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार की नई PRAGATI-50 पहल ( PRAGATI-50 Initiative) के तहत उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार नगर निगम को देश के 50 मॉडल शहरों में शामिल किया गया है. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में इस पहल का शुभारंभ किया.
PRAGATI-50 का उद्देश्य देश के चयनित 50 शहरों में स्वच्छता के उच्च मानक विकसित करना है. इसके तहत शहरी स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन, साफ-सफाई और नागरिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में तय मानकों के आधार पर काम और निगरानी की जाएगी. ये 50 शहर 24 राज्यों में शामिल हैं.
PRAGATI-50 Initiative:देहरादून और हरिद्वार पर खास नजर
उत्तराखंड से देहरादून और हरिद्वार का चयन राज्य के लिए महत्वपूर्ण है. देहरादून राज्य की राजधानी और तेजी से विस्तार करता प्रमुख शहरी केंद्र है, जबकि हरिद्वार देश के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन शहरों में शामिल है. PRAGATI-50 में आर्थिक, सांस्कृतिक, विरासत, तीर्थ, पर्यटन और प्रशासनिक महत्व वाले शहरों को शामिल किया गया है.
इस पहल के तहत दोनों नगर निगमों में स्वच्छता व्यवस्था को तय प्रदर्शन मानकों के आधार पर और मजबूत करने पर जोर रहेगा. खास तौर पर कचरे के बेहतर प्रबंधन, स्वच्छ सार्वजनिक स्थानों, इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन और नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा.
तकनीक के जरिए होगी स्वच्छता की निगरानी
PRAGATI-50 के तहत केवल सफाई अभियान चलाने के बजाय KPI आधारित कार्रवाई और तकनीक आधारित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है. केंद्र के अनुसार चयनित शहरों में नियमित समीक्षा और निगरानी के जरिए स्वच्छता के परिणामों को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा.
इसका सीधा असर देहरादून और हरिद्वार की शहरी स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ सकता है. दोनों शहरों में कचरा संग्रहण से लेकर उसके निस्तारण और नागरिक शिकायतों के समाधान तक पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर फोकस रहेगा.
स्वच्छता स्टार्टअप्स को भी मिलेगा बढ़ावा
PRAGATI-50 के लॉन्च के साथ स्वच्छता के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए Swachhata Startups के तीसरे कोहोर्ट को भी शुरू किया गया है. यह पहल आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और IIT कानपुर के Startup Incubation and Innovation Centre के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है. इस कोहोर्ट में 13 स्टार्टअप शामिल किए गए हैं.
इन स्टार्टअप्स से स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की समस्याओं के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने की उम्मीद है. ऐसे समाधान भविष्य में देहरादून और हरिद्वार जैसे शहरों में भी उपयोगी हो सकते हैं.
CSIR-CMERI का Swachh Bharat Test Bed भी शुरू
कार्यक्रम में CSIR-CMERI का Swachh Bharat Test Bed and Innovation Centre भी लॉन्च किया गया. इसका उद्देश्य स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों के शोध, परीक्षण, सत्यापन और क्षमता निर्माण के लिए मंच उपलब्ध कराना है.
इससे नई तकनीकों को शहरों में बड़े स्तर पर लागू करने से पहले उनका परीक्षण और मूल्यांकन करने में मदद मिल सकती है.
नागरिकों की भागीदारी पर भी जोर
केंद्र ने स्वच्छता व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए Swachhata Behaviour Change Digital Kosh भी लॉन्च किया है. इसमें स्वच्छता से जुड़े आइडिया, क्रिएटिव, अभियान और संसाधनों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी.
इसके अलावा नागरिकों के लिए एक समर्पित WhatsApp चैनल भी शुरू किया गया है, जिसके जरिए स्वच्छता संबंधी शिकायतों और फीडबैक को दर्ज कराने की सुविधा को और आसान बनाने का प्रयास किया गया है.
हरिद्वार के लिए क्यों अहम है पहल?
हरिद्वार में वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है. PRAGATI-50 के तहत हरिद्वार को मॉडल सिटी के रूप में विकसित करने का प्रयास तीर्थ और पर्यटन आधारित शहरी व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है.
वहीं, देहरादून में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के बीच ठोस कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक स्वच्छता और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता को मजबूत करना बड़ी चुनौती है. ऐसे में PRAGATI-50 के तहत तकनीक आधारित निगरानी और निर्धारित प्रदर्शन मानकों पर काम करने की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है.
RRR सेंटर की भी शुरुआत
नई दिल्ली के संकल्प भवन में Reduce, Reuse and Recycle (RRR) Centre का भी उद्घाटन किया गया. इसका उद्देश्य सरकारी कार्यस्थलों में टिकाऊ खपत, वस्तुओं के पुन: उपयोग, संसाधनों की रिकवरी और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है.
कुल मिलाकर, PRAGATI-50 के तहत देहरादून और हरिद्वार का चयन उत्तराखंड के शहरी निकायों के लिए स्वच्छता व्यवस्था को तकनीक, बेहतर कचरा प्रबंधन और नागरिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा. केंद्र की योजना इन 50 शहरों को स्वच्छता के ऐसे मॉडल के रूप में विकसित करने की है, जिनसे दूसरे शहर भी सीख सकें.

