वाराणसी, यूपी: ठंड शुरू होते ही साइबेरियन पक्षी वाराणसी के इन्हीं घाटों पर कलरव करके न सिर्फ सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित करते थे. बल्कि यहां के स्थानीय लोगों के लिए भी मनोरंजन का साधन हुआ करते थे. लोग गंगा घाट पर जाते थे और चिड़ियों को दाना खिलाकर प्रसन्नता का अनुभव करते थे.
प्रदूषण और जानलेवा मांझा से डरे पक्षी
यह माइग्रेटरी बर्ड हर साल नवंबर के महीने में गंगा घाटों पर आ जाते थे और मार्च महीने तक यहां प्रवास करते थे. अपनी चहचहाहट और खूबसूरती की वजह से इन मासूम पक्षियों का लोग तहे दिल से इस्तकबाल किया करते थे . लेकिन वाराणसी के गंगा घाट पर पतंगबाजी चाइनीज मांझा और प्रदूषण की वजह से इस साल यह पक्षी यहां से इसी महीने में पलायन कर गए हैं.
पक्षियों के बचाव में फेल हुई सरकार
गंगा घाट पर जो सैलानी इनकी तलाश में आते थे उन्हें इनकी कमी खलने लगी है. क्योंकि लोग अपने बच्चों को लेकर आते थे और मासूम चिड़ियों को दाना खिलाकर खिलखिलाया करते थे. आज यह पक्षी चाइनीज मांझा की वजह से इसी महीने में गंगा और गंगा घाट से गायब हो गए हैं. यह अलग बात है कि चाइनीज मंझे पर प्रशासन की तरफ से रोक है लेकिन दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि प्रशासन इसे रोकने में पूरी तरह से नाकाम है. अक्सर देखा जाता था की झुंड में आने वाले यह पक्षी दाना के चक्कर में लोगों के पास तक चले आते थे लेकिन उसी बीच में पतंग की डोर में फंसकर घायल भी होते थे और कभी कभी मर भी जाते थे. अब इन पक्षियों में दहशत है और जाहिर है कि यह कंफर्टेबल फिल नहीं कर रहे हैं.
वाराणसी को पक्षियों ने किया अलविदा
यही कारण है कि अपना प्रवास का स्थान इन्होंने वाराणसी के अलावा कहीं और बना लिया है. गंगा घाट के किनारे रहने वाले लोगों का मानना है कि प्रदूषण और और चाइनीज मंझा इसका मुख्य कारण हो सकता है. वैसे इसकी जांच करके ही इनके माइग्रेशन का पता लगाया जा सकता है.

