Friday, February 23, 2024

बच्चे का अपहरण कर 30 लाख की फिरौती मांगने वाले गैंग का यूपी पुलिस ने किया एनकाउंटर

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए यूपी पुलिस दिन रात एक किये हुए हैं. सूबे को अपराध मुक्त बनाये रखने के लिए अगर पुलिस के जवानों को मौत का सामना भी करना पड़े. तो वो पीछे नहीं हटते .इस बात की तस्दीक करता हुआ ताज़ा मामला सामने आया है ग्रेटर नोएडा से . जहाँ किराना व्यापारी के 11 साल के बेटे का अपहरण कर 30 लाख रुपये की फिरौती वसूलने वाले बदमाश का यूपी पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया . हालांकि इस एनकाउंटर में पुलिस कर्मी भी घायल हुए लेकिन अपनी जान पर खेलकर यूपी पुलिस के जांबाज़ जवानों ने बच्चा और 29 लाख का कैश बरामद कर लिया है.
मिली जानकारी के तहत यह मुठभेड़ बीटा दो थाना इलाके के चूहड़पुर अंडरपास के पास हुई है. इस एनॉउंटर में नॉलेज पार्क थाना प्रभारी वरुण पंवार भी गोली लगने से घायल हुए जबकि बीटा दो कोतवाली प्रभारी अनिल राजपूत की बुलेटप्रुफ जैकेट में भी गोली धंसी हुई पाई गई.

दरअसल लुक्सर गांव के रहने वाले किराना कारोबारी मेघ सिंह ने अपने 11 साल के बेटे की गुमशुदा होने की सूचना नोएडा पुलिस को दी थी. शिकायत में बताया गया था कि उन्हें एक अनजान  कॉल आया था. जिसमें बेटे को सही सलामत छोड़ने के लिए 30 लाख रूपये की फिरौती मांगी गई थी. इस पर थाना ईकोटेक-1 पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच में शुरु कर दी.उसी का नतीजा है कि आज बच्चा सही सलामत मिल गया. जांच के लिए ग्रेटर नोएडा जोन और सेन्ट्रल नोएडा जोन से पुलिस टीम और स्वाट टीम गठित की गई थी. जिसके बाद इस ऑपरेशन के तहत 3 अक्टूबर की तड़के पुलिस की लुक्सर जेल के पास बदमाशों से मुठभेड़ हो गई और इस मुठभेड़ में विशाल मौर्य और ऋृषभ गोली लगने से घायल हो गए थे, लेकिन मुख्य अपहरणकर्ता शिवम फरार हो गया था.

पुलिस टीमें तभी से शिवम की तलाश में जुटी थीं और दोपहर बाद चूहड़पुर अंडरपास के पास हुई दूसरी मुठभेड़ में शिवम ढेर हो गया. पुलिस अब उसका आपराधिक इतिहास तलाशने में जुटी है.
पूछताछ में पता चला की घटना का सरगना शिवम है, जो मेघसिंह के घर के पास काफी समय तक किराए पर रहा था. उसने ही अपने साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम देने की साजिश रची थी.
इस कार्रवाई से ये तो साफ़ है कि यूपी पुलिस अपराधियों के खिलाफ बिलकुल सख्त है. फिर चाहे बदमाशों को दबोचने के लिए खुद की ही जान क्यों न देनी पड़ जाए.

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