दिग्गज भारतीय शूटर जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन,भारत के लिए जीता था 23 अंतराष्ट्रीय मेडल

Jaspal Rana passes away : भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई  है. भारत के दिग्गज और स्टार निशानेबाज जसपाल राणा (Jaspal Rana) का शुक्रवार को महज 49 साल की उम्र में निधन  हो गया.

 बताया जा रहा है कि  1 जून को जर्मनी से लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके हार्ट में स्टेंट डाला गया था. आज 12 जून को अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के प्रेसिडेंट कालीकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की है.

Jaspal Rana passes away : मनु भाकर के कोच और जूनियर टीम के मार्गदर्शक थे राणा

जसपाल राणा का जाना भारतीय शूटिंग के लिए एक अपूरणीय क्षति है. वह पेरिस ओलिंपिक में डबल ओलिंपिक मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली स्टार शूटर मनु भाकर के कोच भी रहे थे. हाल ही में फरवरी 2025 में, उन्हें 25 मीटर पिस्टल के लिए भारतीय जूनियर टीम का हाई परफार्मेंस कोच नियुक्त किया गया था.

कॉमनवैल्थ और एशियन गेम्स में जीते कुल 23 मेडल

जसपाल राणा का इंटरनेशनल करियर बेमिसाल रहा. उन्होंने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स को मिलाकर भारत की झोली में कुल 23 मेडल डाले थे.

  • एशियन गेम्स: लगातार 4 बार गोल्ड मेडलिस्ट रहे. उन्होंने कुल 8 मेडल (4 गोल्ड, 2 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज) जीते.

  • कॉमनवेल्थ गेम्स: 9 बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया. उन्होंने कुल 15 मेडल (9 गोल्ड, 4 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज) जीते.

  • अर्जुन अवॉर्ड: उनकी इस अद्भुत प्रतिभा को देखते हुए महज 18 साल की उम्र में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.

यादगार किस्सा: जब वर्ल्ड चैंपियनशिप में दर्द से कराहते हुए बनाया था वर्ल्ड रिकॉर्ड

जसपाल राणा के नाम कई ऐतिहासिक जीत दर्ज हैं, लेकिन 1994 की मिलान वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप की कहानी उनके फौलादी हौसलों को  बयां करती है.

प्रतियोगिता से ठीक एक दिन पहले उनके घुटने में एक गंभीर फोड़ा हो गया था. डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की सलाह दी और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज करने से मना कर दिया, लेकिन जसपाल और उनके कोच सनी थॉमस ने देश के लिए खेलने का फैसला किया.

उसी रात अस्पताल से बाहर आते ही उनका फोड़ा फूट गया और दर्द असहनीय हो गया. स्थिति यह थी कि वह अपनी जींस तक नहीं उतार पा रहे थे. ऐसे में उन्होंने अपनी जींस को नीचे से फाड़कर हाफ पैंट बनाई और अगली सुबह शूटिंग रेंज में उतर गए. जसपाल राणा ने उस भयानक दर्द में कराहते हुए न सिर्फ मैच खेला, बल्कि जूनियर कैटगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड स्कोर के साथ अपना पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल जीता. इसी साल उन्होंने हिरोशिमा एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था.

पिता ने 10 साल की उम्र से सिखाई थी शूटिंग

जसपाल के पिता नारायण सिंह राणा इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) में तैनात थे. उन्होंने ही महज 10 साल की उम्र में जसपाल के हाथ में पिस्टल और राइफल थमाई थी. शुरुआत में जसपाल दोनों इवेंट्स का अभ्यास करते थे, लेकिन बाद में फेडरेशन के नियमों के कारण उन्होंने पिस्टल शूटिंग को चुना.

वह बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे. 11-12 साल की उम्र में वह नेशनल लेवल पर खेलने लगे थे और 1988 में सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित 31वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर सबको चौंका दिया था.

अभिनव बिंद्रा ने जताया शोक: ‘जसपाल का जाना भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति’

2008 ओलिंपिक में भारत को शूटिंग का पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा ने जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:

“जसपाल के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध और दुखी हूं। वे मेरे टीम मेट रहे हैं और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली पीढ़ी के एक अहम स्तंभ थे। वह बेहद प्रतिभाशाली और जुनूनी खिलाड़ी थे, जो हर बार रेंज पर उतरते समय देश का गौरव अपने साथ लेकर चलते थे। उनका जाना भारतीय खेल जगत, खासकर निशानेबाजी के लिए बड़ी क्षति है। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और शिष्यों के साथ हैं।”

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