मोरबी ( MORBI GUJRAT)
पांच दिन पहले खुले केवल ब्रिज पर हादसा तब हुआ जब आज रविवार का दिन होने के कारण लोग इस ब्रिज पर खड़े होकर सेल्फीज ले रहे थे. पांच दिन पहले ही इस केवल ब्रिज को मरम्मत के बाद खोला गया था.हादसे की जगह पर SDRF का बचाव दल काम कर रहा हैं. अब तक 84 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं, 50 से ज्यादा लोग लापता बताये जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक हादसे के समय केबल ब्रिज पर पांच सौ से ज्यादा लोग मौजूद थे. चार सौ से ज्यादा लोगों के नीचे नदी में गिरने की खबर हैं.
NDRF और अन्य बचाव दल यहां रात भर रेस्क्यू आपरेशन चलायेगी. रेस्क्यू में सबसे बड़ी दिक्कत ये आ रही है कि रात के समय में अंधेरे के कारण दूर तक देख पाना मुश्किल हो रहा है.
रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से हो सके इसके लिए चेक चेक को तोड़ा गया है ताकि जल्द से जल्द पानी निकल सके
केवल ब्रिज को लेकर बड़ी सरकारी लापरवाही सामने रही है. हादसा शाम 6.30 बजे हुआ. बताया जा रहा है कि पांच दिन पहले ही इस पुल को मरम्मत के बाद जानता के लिए खोला गया था लेकिन पुल को खोलने से पहले सुरक्षा संबंधी जांच नहीं की गई. सुरक्षा सर्टिफिकेट तक नहीं लिया गया. स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक ज्यादा पैसा कमाने के लिए क्षमता से ज्यादा टिकट बेचे गये और बिना रोक टोक लोगों को पुल पर जाने दिया गया.
हादसे के कारण की अभी कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षमता से अधिक संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण घटना हुई. कहा तो यहां तक जा रहा है कि लापरवाहियां इस हद तक की गई कि 140 साल पुराने इस पुल पर हादसे की आशंका के बावजूद किसी तरह का एहतियात नही किया गया. मोरबी में ये ‘झूलता हुआ पुल’ मशहूर पर्यटन स्थल है. छुट्टियों के समय में यहा बड़ी संख्या मे लोग घूमने आते हैं. आशंका के बावजूद यहां पुल पर अधिक संख्या में लोगो को आने से रोका नहीं गया.
हादसे के बाद मुख्यमंत्री भूपेश पटेल मोरबी पहुंच चुके हैं.अस्पताल में घायलों का हाल ले रहे हैं. घायलों को हर संभव इलाज मिले इसकी देख रेख कर रहे हैं.
लेकिन एक बार फिर सवाल यही उठता है कि इस झूलते हुए पुल को मौत का पुल बनाने की जिम्मेदार कौन है ?
140 साल पुराना ये पुल ,जिसकी कई बार मरम्मत की जा चुकी है इसके बावजूद ये बात तय थी कि ये पुल ज्यादा बोझ उठाने में सक्षम नहीं है , फिर भी मोरबी प्रशासन की तरफ से यहां लोगों को इस मौत के पुल पर आने के लिए टिकट दिये गये.
प्रशासन को ये पहले से पता था कि दिवाली की छुट्टियां और रविवार होने के कारण हर साल की तरह इस साल भी लोग बड़ी संख्या में यहां आयेंगे, इसके बावजूद कोई सतर्कता नहीं बरती गई. यहां तक कि प्रशासन ने संभवतह आनन फानन में बिना सुरक्षा सर्टिफेकेट के इस पुल को खोला भी इसीलिये होगा कि इससे बड़ी कमाई की जा सके. वर्ना इतनी भी क्या जल्दी थी कि बिना सुरक्षा सर्टिफिकेट के पुल को खोल दिया गया और 80 से ज्यादा लोगों की जान चली गई.
अब इस हादसे के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जायेगा?
प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई है. इस घटना के बारे में लापरवाही को नकारा नही जा सकता है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस पुल को 140 साल पहले मोरबी के महाराजा ने बनवाया था. इस पुल को आम लोगं क लिए कई दशक पहले ही बद कर दिया गया था लेकिन हाल ही में एक निजी कंपनी ओरेवा ग्रुप ने इस पुल की मरम्मत और निगरानी का जिम्मा लिया था. बताया जा रहा है कि इस कंपनी ने 8 करोड़ की लागत से पुल की मरम्मत भी कराई . इस ब्रिज की जांच करने वाली एजेंसी ने अपनी अफनी जांच के बाद लिख था कि ये पुल 100 से ज्यादा लोगों का बोझ नहीं उठा सकता है.लेकिन आज रविवार और दिवाली की छुट्टी का आखिरी दिन होन के कारण करीब पांच सौ लोग इस पुल पर पहुंच गये.

