Sunday, May 26, 2024

दो पक्षियों की ऐसी प्रेम कहानी जो बन गई हज़ारों की आस्था का केंद्र, जानिये क्या है इस प्रेमी जोड़े की कहानी !

आपने कई प्रेम के किस्से सुने होंगे लैला मजनू, हीर राँझा की प्रेम कहानियां आज भी दुनिया के कोने-कोने में मशहूर हैं. आज भी उनके प्रेम की मिसाल दी जाती है. उनके प्रेम को लोग पूजते हैं. तो ऐसी ही एक और प्रेम कहानी की मिसाल भारत की धरती पर मौजूद है जो यक़ीनन बाकि सभी कहानियों से अलग है. यहाँ तक कि ये प्रेम कहानी इतनी अजब है कि उसकी याद में एक मंदिर बनाया गया जहाँ बेहद नायाब मूर्तियां भी हैं लेकिन ये मूर्तियां किसी देवी देवता की नहीं, किसी लैला मजनू की भी नहीं बल्कि दो ऐसे विलुप्त हो रहे पक्षियों के जोड़े की है जिसे गिद्ध जोड़े की प्रेम कहानी को याद रखने के लिए बनाया गया.वो मंदिर आज भी उन गिद्धों की प्रेम कहानी को बयां कर रहा है.
इस मंदिर को लोग गिद्ध सती मंदिर के नाम से पुकारते हैं. यहां हर रोज सैकड़ों लोग आकर पूजा पाठ करते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं. पूजा-पाठ करने वाले लोगों का दावा है कि यहां उनकी हर मनोकामना पूरी होती है. मंदिर परिसर में हर साल एक महीने का मेला भी लगता है जिसमें सिर्फ लखीमपुर या उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि हमारे पड़ोसी मुल्क नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं. वहां भी इस मंदिर की मान्यता बहुत है.
ये मंदिर लखीमपुर खीरी जिले की सदर तहसील क्षेत्र के कोठीला ग्राम पंचायत में लखीमपुर से पड़ोसी देश नेपाल की सीमा तक जाने वाले सड़क के किनारे बना हुआ है. इस मंदिर में दो मूर्तियां स्थापित हैं लेकिन यह मूर्तियां किसी देवी-देवताओं की नहीं बल्कि गिद्ध जोड़े की हैं. इस इलाके में रहने वाले और मंदिर में आस्था रखने वाले लोगों का दावा है कि करीब 65 साल पहले यानी सन 1962 के जुलाई महीने में गांव से कुछ दूरी पर नहर के किनारे एक पशु की मौत हो गई थी, जिसे खाने के लिए गिद्धों का झुंड आ गया था. जानवर का मांस खाने के बाद सभी गिद्ध उड़ गए लेकिन एक गिद्ध की मौत वहीं पर हो गई थी. दावा किया जा रहा है कि गिद्ध की मौत के वक्त एक मादा गिद्ध भी साथ में मौजूद थी. साथी गिद्ध की मौत के बाद दूसरी मादा गिद्ध ने भी खाना पीना छोड़ दिया था. यह देख कर वहां कई दिन तक लोगों का जमावड़ा रहा. स्थानीय लोग बताते हैं कि जिंदा गिद्ध मृत गिद्ध की लाश पर बैठी रहती थी. इस दौरान अगर कोई उसे हाथ से छूकर हटाता था और कुछ खाना पानी देता था तो वह कुछ खाए बिना ही वहां से थोड़ी दूर नहर पर जाकर बैठा जाती थी. फिर कुछ देर बाद वापस लौट कर मृत गिद्ध के शव पर आ जाती थी. यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा था. फिर करीब 10 दिनों के बाद दूसरी गिद्ध ने भी अपने साथी गिद्ध की लाश के पास ही दम तोड़ दिया. गिद्ध जोड़ों के बीच की प्रेम कहानी क्षेत्र के हर बुजुर्ग और जवान की जुबान पर रटी हुई है.
इसके बाद गांव वालों ने दोनों मृतक गिद्धों के शवों का विधि विधान से गांव के पास ही अंतिम संस्कार कर दिया. साथ ही एक छोटा मंदिर भी बना दिया जिसमें दोनों गिद्धों की मूर्तियां रखी गई. आगे चलकर यहां काफी लोग श्रद्धा भाव से आने लगे. पूजा पाठ होने लगी. जिसके बाद गांव वालों ने मिलकर भव्य मंदिर बना दिया और उसमें दो गिद्धों की मूर्तियों को स्थापित करा दिया जिसे नाम दिया गया सती मंदिर.

तब से हर साल यहाँ मेला लगता है. जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. मंदिर में माथा टेकते हैं और मुराद मांगते हैं. इस मंदिर की आस्था का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि मंदिर की श्रद्धा और इसकी कहानी पड़ोसी मुल्क नेपाल तक फैली है.

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