भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट डिप्लोमेसी और खेल के रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ा और बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के पूर्व अवर सचिव (अंडर सेक्रेटरी) आरवीएस मणि के एक होश उड़ा देने वाले बयान ने दोनों देशों के बीच पुराने दौर में हुए क्रिकेट दौरों से जुड़े बड़े विवादों को दोबारा हवा दे दी है।
एक हालिया डिजिटल पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान पूर्व शीर्ष अधिकारी ने बेहद गंभीर और सनसनीखेज दावा किया है कि अतीत में जब भी पाकिस्तानी क्रिकेट टीम या उनका कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर आता था, तो उसके कुछ सदस्य कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी (नशीले पदार्थों की स्मगलिंग) के नेटवर्क में शामिल होते थे। आरवीएस मणि ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस पूरी गैर-कानूनी और देश विरोधी गतिविधि के पीछे पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का सीधा हाथ और संरक्षण होता था।
शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ पर बड़ा आरोप; पाकिस्तानी उच्चायुक्त के सामने कबूली थी प्रतिबंधित ड्रग्स लाने की बात
नई दिल्ली: इस इंटरव्यू के दौरान जब आरवीएस मणि से विशिष्ट खिलाड़ियों और घटनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पाकिस्तान के दो सबसे चर्चित और विवादित तेज गेंदबाजों का नाम लेकर सीधे निशाना साधा:
खिलाड़ियों का कबूलनामा: पूर्व अधिकारी ने दावा किया कि यह बात बाकायदा आधिकारिक रिकॉर्ड और रिपोर्ट में दर्ज हुई थी कि तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ ने स्वयं नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त (हाई कमिश्नर) के सामने यह बात स्वीकार की थी कि वे अपने साथ सीमा पार से नशीले पदार्थ (ड्रग्स) लेकर आए हैं।
व्यक्तिगत इस्तेमाल का दावा खारिज: पॉडकास्ट की एंकर ने जब यह याद दिलाया कि उस वक्त दोनों खिलाड़ियों ने इन पदार्थों को अपने निजी उपभोग (पर्सनल यूज) के लिए होना बताया था, तो आरवीएस मणि ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत लत का मामला नहीं था, बल्कि जब भी पाकिस्तान का कोई बड़ा प्रतिनिधिमंडल, सांस्कृतिक दल या क्रिकेट टीम भारत आती थी, तो रणनीतिक तौर पर ड्रग्स की बड़ी खेप यहां डंप करने के लिए तस्करी की जाती थी।
अक्टूबर 2006 का वह वाकया: आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले भारत से रातों-रात वापस भेजे गए थे दोनों गेंदबाज
नई दिल्ली: गौरतलब है कि आरवीएस मणि द्वारा किया गया यह दावा खेल इतिहास की एक बड़ी और प्रामाणिक घटना से पूरी तरह मेल खाता है, जिसकी रिपोर्ट वैश्विक खेल मीडिया (जैसे ईएसपीएन-क्रिकइन्फो) ने भी विस्तृत रूप से की थी:
डोपिंग में पकड़े गए थे खिलाड़ी: अक्टूबर 2006 में भारत में आयोजित होने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के शुरू होने से ठीक पहले शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ को अचानक बेहद रहस्यमय तरीके से भारत दौरा बीच में छोड़कर वापस पाकिस्तान भेज दिया गया था।
पीसीबी ने दी थी सफाई: उस समय पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने आधिकारिक तौर पर बताया था कि टूर्नामेंट से पहले कराए गए आंतरिक डोपिंग परीक्षण में ये दोनों खिलाड़ी प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड 'नैंड्रोलोन' के सेवन के दोषी पाए गए हैं, जिसके कारण उन्हें तुरंत वापस बुलाया जा रहा है। हालांकि, बाद में दिसंबर 2006 में पाकिस्तान के एक आंतरिक ट्रिब्यूनल ने उन्हें इन आरोपों से तकनीकी आधार पर बरी कर दिया था, लेकिन भारत के गृह मंत्रालय के पास इस मामले के इनपुट्स कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे।
पूर्व इंग्लिश कोच बॉब वूल्मर की 2007 की संदिग्ध मौत का भी कनेक्शन; ड्रग्स तस्करी का विरोध करने पर मर्डर की आशंका
नई दिल्ली: आरवीएस मणि ने अपने दावों के सिलसिले को यहीं नहीं रोका, बल्कि उन्होंने साल 2007 के विश्व कप के दौरान वेस्टइंडीज में हुई पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तत्कालीन इंग्लिश कोच बॉब वूल्मर की रहस्यमय मौत के तार भी इसी ड्रग्स सिंडिकेट से जोड़ दिए:
कोच कर रहे थे विरोध: पूर्व अधिकारी का कहना है कि शोएब और आसिफ वाली घटना के महज छह महीने बाद ही वेस्टइंडीज में पाकिस्तान के मुख्य कोच बॉब वूल्मर की लाश उनके होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली थी। मणि का दावा है कि वूल्मर को अपनी टीम के खिलाड़ियों और आईएसआई के इस काले कारनामे की भनक लग गई थी और वे पाकिस्तानी दल द्वारा की जा रही इस ड्रग्स तस्करी का लगातार कड़ा विरोध कर रहे थे।
जांच एजेंसियों की नाकामी: हालांकि, यह भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि बॉब वूल्मर की मौत की जांच जमैका पुलिस, स्कॉटलैंड यार्ड और कई अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों ने की थी, लेकिन आधिकारिक तौर पर आज तक इस मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी नहीं सुलझ सकी और न ही इसमें ड्रग्स तस्करी के किसी पहलू की आधिकारिक पुष्टि हो पाई। मणि का कहना है कि अगर इन सभी कड़ियों (डॉट्स) को आपस में जोड़ा जाए, तो यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि पाकिस्तानी दल का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की डिलीवरी के लिए होता था।
आतंकवाद की फंडिंग से जुड़े थे तार; भारत में 30% आतंकी हमलों के पीछे था ड्रग्स का पैसा
नई दिल्ली: पूर्व अंडर सेक्रेटरी ने इस पूरे मामले को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए इसे सीधे तौर पर सीमा पार से होने वाले आतंकवाद (क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म) की फंडिंग से जोड़ा:
सरकारी नीति का हिस्सा: आरवीएस मणि ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान गृह मंत्रालय के उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठकों में इस बात पर गहन चर्चा होती थी कि भारत के खिलाफ होने वाले आतंकी ऑपरेशन्स के लिए पैसा कहां से आ रहा है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में होने वाले लगभग 30 प्रतिशत आतंकवादी हमलों की फंडिंग सीधे तौर पर इसी नशीले पदार्थों के व्यापार (नार्को-टेररिज्म) के जरिए की जाती थी।
अफगानिस्तान की फसल और भारत में हमले: उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला सुरक्षा विश्लेषण साझा करते हुए कहा, "हमारा खुफिया आकलन यह कहता था कि यदि पड़ोसी देश के प्रभाव वाले जलालाबाद (अफगानिस्तान) के इलाकों में अफीम की फसल अच्छी होती थी, तो हम मान लेते थे कि आने वाले महीनों में भारत में आतंकी हमलों और घुसपैठ की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। पाकिस्तान इसे अपनी एक सोची-समझी सरकारी नीति (स्टेट पॉलिसी) के तहत संचालित करता था।"
शाहिद अफरीदी और सलीम मलिक के नामों का भी जिक्र; पूरी टीम के शामिल होने की जताई आशंका
नई दिल्ली: पॉडकास्ट के अंतिम हिस्से में जब पूर्व अधिकारी से यह तीखा सवाल पूछा गया कि आखिर पाकिस्तान सरकार या वहां की एजेंसियां इस काले धंधे के लिए अपने देश के इतने बड़े और लोकप्रिय सेलिब्रिटीज या क्रिकेटरों का इस्तेमाल क्यों करती थीं, तो आरवीएस मणि ने कुछ और बड़े नाम उछाले:
सेलिब्रिटी स्टेटस का फायदा: मणि ने तार्किक रूप से समझाया कि शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे खिलाड़ी बेहद लोकप्रिय चेहरे थे, जिन पर सुरक्षा एजेंसियों को आसानी से शक नहीं होता था। उन्होंने कहा कि इसी तरह सलीम मलिक और पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी भी अपने दौर के सबसे चर्चित और बड़े क्रिकेटरों में से एक रहे हैं।
पूरी टीम पर शक के दायरे: हालांकि आरवीएस मणि ने यह साफ किया कि इस विशिष्ट ड्रग्स केस की फाइलों में सलीम मलिक या शाहिद अफरीदी का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन खुफिया इनपुट्स और विभागीय आकलन के आधार पर यह पूरी आशंका थी कि इस खेल के पीछे सिर्फ एक-दो खिलाड़ी नहीं, बल्कि लगभग पूरी की पूरी पाकिस्तानी टीम और उनके साथ आने वाला स्टाफ इस संगठित नेटवर्क का हिस्सा हुआ करता था और भारत दौरे पर लगातार इस तरह की देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देता था।

