नई दिल्ली| विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च नियामक संस्था फीफा (FIFA) के अध्यक्ष जियानी इनफैनटिनो ने विश्व कप के मुनाफे को निजी इक्विटी कंपनियों के साथ साझा करने से जुड़ी अपनी बेहद विवादास्पद योजना को आखिरकार वापस ले लिया है। दुनिया भर की प्रमुख और दिग्गज फुटबॉल संस्थाओं की तरफ से मिले तीखे विरोध के बाद आखिरकार इनफैनटिनो को अपने इस फैसले पर यू-टर्न लेना ही पड़ा।
इनफैनटिनो ने शुक्रवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि खेल से जुड़े विभिन्न पक्षों और संगठनों के साथ हुई लंबी बातचीत के बाद यह साफ हो गया था कि यह प्रस्ताव फुटबॉल जगत के भीतर भारी मतभेद पैदा कर रहा है। ऐसे माहौल में इस योजना को आगे बढ़ाना खेल के हित में बिल्कुल नहीं होगा।
क्या था फीफा अध्यक्ष का पूरा प्रस्ताव?
फीफा अध्यक्ष ने विश्व कप के सुचारू संचालन और उससे होने वाले भारी-भरकम राजस्व (रेवेन्यू) के प्रबंधन के लिए करीब 20 अरब डॉलर के मूल्यांकन वाली एक नई कमर्शियल कंपनी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। इस योजना के तहत बाहरी निजी निवेशकों और इक्विटी फर्मों को भी इसमें हिस्सेदारी देने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, दुनिया भर की कई बड़ी फुटबॉल संस्थाओं ने इसे खेल के अत्यधिक व्यावसायीकरण की दिशा में एक खतरनाक कदम बताते हुए इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया।
यूईएफए से लेकर एशियाई महासंघ तक ने किया कड़ा विरोध
इस प्रस्ताव के खिलाफ सबसे मुखर विरोध यूरोपीय फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था यूईएफए (UEFA) की तरफ से देखने को मिला। यूईएफए के सभी 55 सदस्य देशों ने फीफा के इस कदम के खिलाफ एकजुट होकर विश्व कप और फीफा की अन्य प्रमुख प्रतियोगिताओं के पूर्ण बहिष्कार तक की चेतावनी तक दे डाली थी। इसके तुरंत बाद उत्तरी अमेरिका की फुटबॉल संस्था 'कॉनकाकाफ' और एशियाई फुटबॉल महासंघ (AFC) ने भी खुलकर विरोध दर्ज कराया। इन सभी संगठनों का स्पष्ट मानना था कि विश्व कप जैसी प्रतिष्ठित और पवित्र प्रतियोगिता के मुनाफे में निजी निवेशकों को शामिल करना फुटबॉल के मूल स्वरूप, उसकी गरिमा और स्वायत्तता पर एक बड़ा आघात साबित हो सकता है।
वरिष्ठ सलाहकार ने भी पद से दिया इस्तीफा
यह विरोध केवल बाहरी फुटबॉल संगठनों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि खुद फीफा के भीतर भी इसका असर देखने को मिला। इनफैनटिनो के अपने वरिष्ठ सलाहकार और व्हाइट हाउस की एक समिति के पूर्व सदस्य कार्लोस कॉर्डेइरो ने भी इस योजना के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस अचानक इस्तीफे को फीफा प्रशासन पर पड़े भारी दबाव की एक बहुत बड़ी वजह माना जा रहा है।
इनफैनटिनो बोले— 'हम फुटबॉल को बांटना नहीं, बल्कि एकजुट करना चाहते हैं'
चतर तरफ से लगातार बढ़ते भारी विरोध के बीच इनफैनटिनो ने अपने बयान में नरमी बरतते हुए कहा, "सभी पक्षों के विचारों और चिंताओं को जानने के बाद यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि इस योजना की वजह से खेल जगत में ऐसे विभाजन पैदा हो गए हैं, जो हमारे मूल उद्देश्यों के बिल्कुल अनुकूल नहीं हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य हमेशा से पूरी दुनिया के फुटबॉल जगत को एकजुट रखना और उसमें सकारात्मक सुधार करना रहा है। भविष्य में भी हम इसी महान दिशा में मिलकर काम करते रहेंगे। यही वजह है कि इस प्रस्ताव को अब पूरी तरह से वापस लिया जा रहा है और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।" फीफा अध्यक्ष के इस बड़े फैसले के बाद फिलहाल विश्व कप के मुनाफे में निजी इक्विटी कंपनियों की हिस्सेदारी वाली योजना पर हमेशा के लिए विराम लग गया है।

